WHO प्रमुख ने ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमलों को बताया गंभीर खतरा

WHO प्रमुख ने ईरान के परमाणु संयंत्रों पर हमलों को बताया गंभीर खतरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (World Health Organization) के महानिदेशक टेड्रोस एडनॉम घेब्रेयेसस ने ईरान के बुशहर परमाणु ऊर्जा संयंत्र के पास हुए एयर स्ट्राइक के बाद गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि इस प्रकार के हमले वैश्विक स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बन सकते हैं।

टेड्रोस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (formerly Twitter) पर पोस्ट करते हुए कहा कि इस तरह की घटनाएं हमें सावधान रहने का संकेत देती हैं। उनके अनुसार, किसी परमाणु केंद्र पर हमला एक बड़े परमाणु हादसे को जन्म दे सकता है, जिसका असर कई पीढ़ियों तक लोगों के स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि जैसे-जैसे क्षेत्र में संघर्ष बढ़ रहा है, वैसे-वैसे जोखिम भी बढ़ता जा रहा है।

यह बयान International Atomic Energy Agency की उस रिपोर्ट के बाद सामने आया है, जिसमें बताया गया कि एक प्रोजेक्टाइल बुशहर प्लांट के पास गिरा। इस घटना में मलबे की चपेट में आने से संयंत्र के एक कर्मचारी की मृत्यु हो गई।

बुशहर परमाणु संयंत्र ईरान का एकमात्र सक्रिय न्यूक्लियर पावर प्लांट है, जो Bushehr में स्थित है। इस शहर की आबादी लगभग 2.5 लाख है और यह देश के प्रमुख औद्योगिक और सैन्य केंद्रों में शामिल है। शनिवार, 4 अप्रैल को इस संयंत्र पर हमले की खबर सामने आई थी।

आईएईए ने भी शनिवार को जानकारी दी कि ईरान ने सुबह इस प्रोजेक्टाइल के गिरने की पुष्टि की। एजेंसी के अनुसार, हाल के हफ्तों में यह चौथी बार है जब इस तरह की घटना हुई है। हमले के कारण संयंत्र की एक इमारत को नुकसान पहुंचा और एक सुरक्षा कर्मचारी की जान चली गई। हालांकि, राहत की बात यह रही कि इस घटना के बाद विकिरण स्तर में कोई वृद्धि दर्ज नहीं की गई।

आईएईए के महानिदेशक रफेल ग्रॉसी ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि परमाणु संयंत्रों के आसपास किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की।

ग्रॉसी ने यह भी दोहराया कि परमाणु सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सात महत्वपूर्ण स्तंभों का पालन जरूरी है। इनमें संयंत्र की भौतिक सुरक्षा, उपकरणों की कार्यक्षमता, कर्मचारियों की सुरक्षा, बिजली आपूर्ति, लॉजिस्टिक समर्थन, विकिरण निगरानी और प्रभावी संचार शामिल हैं। इन उपायों का उद्देश्य संभावित परमाणु दुर्घटनाओं और रेडियोधर्मी रिसाव जैसे खतरों को रोकना है।

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