मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रदेश के जलीय और वन्यजीवों के संरक्षण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा है कि प्रकृति की सेवा ही ईश्वर की सच्ची सेवा है। उन्होंने जोर देकर कहा कि चंबल की नदियों में फलने-फूले कछुए अब ‘नमामि गंगे’ मिशन के तहत गंगा नदी के पुनर्जीवन में ‘प्राकृतिक सफाई-योद्धा’ की भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार, चीता पुनर्वास और कछुओं का विमुक्तिकरण मध्यप्रदेश को वैश्विक संरक्षण मानचित्र पर मजबूती से स्थापित करेगा। इसी कड़ी में 26 अप्रैल 2025 को चंबल संरक्षण केंद्रों से 20 अत्यंत दुर्लभ ‘रेड क्राउन रूफ्ड टर्टल’ (बटागुर) को उत्तर प्रदेश के हैदरपुर वेटलैंड और गंगा की मुख्य धारा में छोड़ा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ये कछुए जैविक कचरे और सड़े-गले अवशेषों को खाकर नदी को प्राकृतिक रूप से साफ रखते हैं। जल शक्ति मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, इन प्रयासों से गंगा के पानी की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। वाराणसी के अस्सी घाट और पटना के गांधी घाट पर फीकल कोलीफॉर्म (FC) के स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है, जबकि अधिकांश स्थानों पर डिजॉल्व्ड ऑक्सीजन (DO) का स्तर 5.0 mg/l से अधिक हो गया है, जो जलीय जीवन के लिए एक शुभ संकेत है।