सबरीमाला विवाद सहित कई मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, महिलाओं के अधिकार बनाम धार्मिक परंपराओं पर मंथन

सबरीमाला विवाद सहित कई मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई, महिलाओं के अधिकार बनाम धार्मिक परंपराओं पर मंथन

सुप्रीम कोर्ट में धार्मिक स्थलों पर महिलाओं के प्रवेश और उनसे जुड़े भेदभाव के मुद्दे पर सुनवाई दूसरे दिन भी जारी है। 9 जजों की संविधान पीठ इस मामले में विभिन्न पक्षों की दलीलें सुन रही है, जिसमें केंद्र सरकार ने पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं का समर्थन किया है।

पहले दिन की सुनवाई में केंद्र ने स्पष्ट किया कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश पर प्रतिबंध को गलत तरीके से ‘अस्पृश्यता’ से जोड़ा जा रहा है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि यह मामला जाति आधारित छुआछूत से पूरी तरह अलग है और इसे उसी नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए।

उन्होंने धार्मिक आस्था और परंपराओं का हवाला देते हुए कहा कि हर धर्म में कुछ विशेष नियम होते हैं, जैसे मस्जिद या गुरुद्वारे में सिर ढंकना। इसी तरह सबरीमाला मंदिर की भी अपनी परंपरा है, जिसे बनाए रखना जरूरी है।

हालांकि, जस्टिस नागरत्ना ने इस तर्क पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि महिलाओं को मासिक धर्म के आधार पर मंदिर में प्रवेश से रोका जाता है, तो यह भी भेदभाव का ही एक रूप है। उन्होंने कहा कि संविधान किसी भी प्रकार की अस्पृश्यता को स्वीकार नहीं करता।

सुनवाई के दौरान यह भी चर्चा हुई कि क्या अदालत को धार्मिक प्रथाओं में हस्तक्षेप करना चाहिए। सरकार का कहना था कि अदालत को केवल उन्हीं मामलों में हस्तक्षेप करना चाहिए, जहां सार्वजनिक व्यवस्था, नैतिकता या स्वास्थ्य प्रभावित हो रहा हो।

यह मामला लंबे समय से न्यायालय में लंबित है और 2018 के फैसले के बाद इसमें नया मोड़ आया, जब महिलाओं को मंदिर में प्रवेश की अनुमति दी गई। अब बड़ी पीठ इस फैसले की वैधता पर पुनर्विचार कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट इस दौरान पांच प्रमुख मामलों पर विचार करेगा, जिनमें सबरीमाला के अलावा दाऊदी बोहरा समुदाय में खतना, मस्जिदों में महिलाओं का प्रवेश, पारसी महिलाओं के धार्मिक अधिकार, और मुस्लिम पर्सनल लॉ में लैंगिक समानता जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इन सभी मामलों में अदालत को यह तय करना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और मौलिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे स्थापित किया जाए, और क्या महिलाओं के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव संवैधानिक रूप से उचित ठहराया जा सकता है।

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