भारत ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे निरंतर हमलों और अंतरराष्ट्रीय नौवहन की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की है। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) की विशेष बैठक में भारत ने स्पष्ट किया कि नेविगेशन की स्वतंत्रता और समुद्री सुरक्षा उसकी आर्थिक व ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
महासभा की यह बैठक उस प्रक्रिया के तहत बुलाई गई थी जिसमें सुरक्षा परिषद के स्थायी सदस्यों (रूस और चीन) को अपने वीटो के उपयोग का कारण स्पष्ट करना था। गौरतलब है कि 7 अप्रैल को रूस और चीन ने बहरीन द्वारा पेश उस प्रस्ताव पर वीटो लगा दिया था, जिसमें ईरान से वाणिज्यिक शिपिंग पर हमले रोकने की मांग की गई थी।
भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरीश ने वीटो के मुद्दे पर किसी भी गुट का पक्ष न लेते हुए एक संतुलित बयान दिया। उन्होंने कहा, “भारत सभी पक्षों से संवाद और कूटनीति के माध्यम से तनाव कम करने की अपील करता है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों और निर्दोष नाविकों को निशाना बनाना अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है और यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है।
भारत की यह चिंता वाजिब है क्योंकि दुनिया के कुल तेल यातायात का लगभग 20 प्रतिशत इसी चोकपॉइंट से होकर गुजरता है। श्री हरीश ने उन भारतीय नाविकों को भी याद किया जिन्होंने इन हमलों में अपनी जान गंवाई है। एक ओर जहाँ अमेरिका और इजरायल ने वीटो की आलोचना की, वहीं रूस और चीन ने इसे ‘एकतरफा प्रस्ताव’ करार देते हुए अपने कदम का बचाव किया। भारत ने इस राजनीतिक खींचतान के बीच अपनी तटस्थता बनाए रखी, लेकिन 11 मार्च के उस प्रस्ताव का सह-प्रायोजक बनकर अपनी स्थिति भी साफ कर दी जिसमें ईरान के क्षेत्रीय हमलों की निंदा की गई थी।