भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को नई गति, व्यापार और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर

भारत-दक्षिण कोरिया साझेदारी को नई गति, व्यापार और तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर जोर

भारत और दक्षिण कोरिया के बीच रणनीतिक संबंधों को नई दिशा मिली है। सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली स्थित हैदराबाद हाउस में दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे-म्योंग के साथ द्विपक्षीय बैठक की, जिसमें दोनों देशों ने व्यापार, तकनीक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करने पर सहमति जताई और कई समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए।

बैठक के बाद उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। जेटलाइन ग्रुप ऑफ कंपनीज के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर और जेटसिंथेसिस के संस्थापक एवं सीईओ राजन नवानी ने कहा कि भारत-कोरिया के बीच व्यापारिक संवाद अत्यंत प्रभावी रहा है। उनके अनुसार, दोनों देशों ने विशेष रूप से जेन जेड, डिजिटल इकोसिस्टम और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए ठोस प्रतिबद्धता दिखाई है, जो आने वाले समय में दीर्घकालिक प्रभाव डालेगी।

वहीं, वारी ग्रुप के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक हितेश दोशी ने ‘मेक इन इंडिया’ पहल को उद्योग जगत के लिए परिवर्तनकारी बताया। उन्होंने कहा कि इस पहल से घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा मिला है और कोरियाई कंपनियां भारत में निवेश कर उत्पादन इकाइयां स्थापित कर रही हैं, जिससे आर्थिक विकास और वैश्विक साझेदारी को नई गति मिल रही है।

इंडियन मेटल्स एंड फेरो अलॉयज लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सुभ्रकांत पांडा ने भी इस साझेदारी को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की नीतियों के कारण भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में मजबूत स्थिति में उभरा है। उन्होंने कहा कि कोरिया की उन्नत तकनीक और भारत की क्षमता, अनुसंधान तथा आपूर्ति श्रृंखला का संयोजन दोनों देशों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा।

इससे पहले प्रधानमंत्री मोदी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार 27 बिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और इसे वर्ष 2030 तक 50 बिलियन डॉलर तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने इस यात्रा को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि करीब आठ वर्षों के बाद कोरिया के राष्ट्रपति का भारत दौरा दोनों देशों के संबंधों को और मजबूत करेगा। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि दोनों देशों के बीच लोकतांत्रिक मूल्यों, बाजार अर्थव्यवस्था और कानून के प्रति सम्मान जैसे साझा आधार मौजूद हैं।

प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत और कोरिया के हित समान हैं, जिसके चलते पिछले दशक में आपसी संबंधों में निरंतर मजबूती आई है। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में यह साझेदारी और व्यापक होगी तथा चिप निर्माण, तकनीक, प्रतिभा विकास और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में सहयोग के नए अवसर सामने आएंगे।

इसके साथ ही उन्होंने जानकारी दी कि दोनों देशों के बीच वित्तीय लेनदेन को सुगम बनाने के लिए भारत-कोरिया फाइनेंशियल फोरम की स्थापना की गई है। साथ ही, औद्योगिक सहयोग समिति का गठन किया गया है और महत्वपूर्ण तकनीकों एवं आपूर्ति श्रृंखला के लिए आर्थिक सुरक्षा संवाद शुरू करने की दिशा में पहल की जा रही है।

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