मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश आज महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में देश के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में उभरा है। स्वामी विवेकानंद के विचारों का उल्लेख करते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि नारी की समृद्धि में ही राष्ट्र की प्रगति निहित है। मुख्यमंत्री ने बताया कि मध्यप्रदेश देश का वह पहला राज्य है जिसने नारी शक्ति के उत्थान के लिए पृथक से ‘जेंडर बजट’ बनाने की शुरुआत की थी। वर्तमान में महिला सशक्तिकरण के लिए आवंटित बजट की राशि बढ़कर 32,730 करोड़ रुपये तक पहुंच गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘ज्ञान’ (GYAN – गरीब, युवा, अन्नदाता और नारी शक्ति) विजन पर चलते हुए राज्य सरकार ने महिलाओं को हर स्तर पर सुरक्षा और अवसर प्रदान किए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में सरकारी नौकरियों में महिलाओं के लिए 35 प्रतिशत और पंचायती राज संस्थाओं में 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है। आज महिलाएं केवल घर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि टोल-नाकों के संचालन से लेकर स्टार्टअप और ड्रोन दीदी के रूप में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा रही हैं।
आर्थिक स्वावलंबन की दिशा में राज्य सरकार की योजनाओं का प्रभाव स्पष्ट दिख रहा है। ‘लाड़ली बहना योजना’ के तहत अब तक 1.25 करोड़ से अधिक बहनों को 54 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि का भुगतान किया जा चुका है। इसके साथ ही ‘देवी अहिल्या नारी सशक्तिकरण मिशन’ के माध्यम से महिलाओं के सामाजिक-आर्थिक विकास पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। पात्र बहनों को मात्र 450 रुपये में गैस सिलेंडर रिफिल की सुविधा प्रदान की जा रही है, जिस पर अब तक 11 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं।
मुख्यमंत्री ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था में महिलाओं की भूमिका की सराहना करते हुए बताया कि प्रदेश में ‘उद्यमिता क्रांति’ का नेतृत्व महिलाएं कर रही हैं। लगभग 5 लाख स्व-सहायता समूहों को 10,560 करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता दी गई है, जिससे 62 लाख ग्रामीण बहनें आत्मनिर्भर बनी हैं। डबल इंजन सरकार की नीतियों—जैसे लाड़ली लक्ष्मी, मातृ वंदना और मिशन वात्सल्य—ने समाज में बेटियों के प्रति दृष्टिकोण में सकारात्मक बदलाव लाने का काम किया है।