भारत और न्यूजीलैंड के आर्थिक संबंधों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। आगामी सोमवार, 27 अप्रैल को दोनों देश ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करेंगे। नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होने वाले इस कार्यक्रम में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार मंत्री टॉड मैक्ले विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे। इस द्विपक्षीय समझौते का मुख्य उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को कम करना और दोनों देशों के बीच निवेश के प्रवाह को नई गति प्रदान करना है।
इस रणनीतिक समझौते के माध्यम से अगले पांच वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार को वर्तमान स्तर से दोगुना कर 5 अरब डॉलर तक पहुंचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा गया है। वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और पश्चिम एशिया के तनावपूर्ण माहौल के बीच, यह समझौता भारतीय निर्यातकों के लिए न्यूजीलैंड के बाजार में नई संभावनाएं पैदा करेगा। दूसरी ओर, न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे ‘पीढ़ी में एक बार मिलने वाला अवसर’ करार देते हुए कहा कि इससे उनके देश के निर्यातकों को भारत की विशाल आबादी वाले बाजार तक सीधी पहुंच मिलेगी।
समझौते की शर्तों के अनुसार, भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड में शुल्क-मुक्त प्रवेश प्राप्त होगा। वहीं, न्यूजीलैंड से भारत आने वाले लगभग 95 प्रतिशत उत्पादों पर सीमा शुल्क में या तो पूरी छूट मिलेगी या भारी कटौती की जाएगी। इसमें ऊन, कोयला, लकड़ी और समुद्री भोजन जैसे उत्पाद शामिल हैं। हालांकि, भारत ने अपनी घरेलू कृषि और डेयरी उद्योग के हितों की रक्षा के लिए डेयरी, प्याज, चीनी और मसालों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इस छूट से बाहर रखने का निर्णय लिया है।
व्यापार के अलावा, यह समझौता पेशेवरों की आवाजाही को भी सुगम बनाएगा। न्यूजीलैंड प्रतिवर्ष 5,000 भारतीय पेशेवरों को अस्थायी रोजगार वीजा देने पर सहमत हुआ है। इसके तहत आईटी और इंजीनियरिंग के साथ-साथ योग प्रशिक्षक, रसोइया और संगीत शिक्षकों जैसे पारंपरिक क्षेत्रों के विशेषज्ञों को भी अवसर मिलेंगे। साथ ही, अगले 15 वर्षों में अवसंरचना और नवाचार जैसे क्षेत्रों में न्यूजीलैंड से लगभग 20 अरब डॉलर के निवेश की उम्मीद जताई जा रही है।