विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत और न्यूजीलैंड के बीच संपन्न हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को ऐतिहासिक बताते हुए इसे दोनों देशों के आर्थिक सहयोग का नया मोड़ बताया है। सोमवार को हुए इस समझौते का उद्देश्य व्यापारिक बाधाओं को दूर कर टैरिफ में राहत प्रदान करना है। जयशंकर के अनुसार, यह संधि दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक विश्वास और भविष्य की ठोस साझेदारी को रेखांकित करती है, जिससे भारतीय उद्योगों और सेवा क्षेत्र को वैश्विक मंच पर बड़ा लाभ होगा।
समझौते के तकनीकी पहलुओं पर गौर करें तो भारत से न्यूजीलैंड जाने वाली सभी टैरिफ लाइनों पर शुल्क समाप्त कर दिया गया है। इससे भारतीय सामान अब बिना किसी अतिरिक्त कर के न्यूजीलैंड के बाजार में प्रवेश कर सकेंगे। भारतीय फार्मास्यूटिकल्स, रसायन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए यह विस्तार का सुनहरा मौका है। साथ ही, कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक मैकेनिज्म की भी व्यवस्था की गई है, जिससे व्यापारिक पारदर्शिता बढ़ेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता विशेष रूप से भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए लाभकारी होगा। 5,000 विशेष वीजा कोटा के माध्यम से भारतीय स्किल्ड वर्कफोर्स अब न्यूजीलैंड में अपनी सेवाएं दे सकेंगे। आईटी, वित्त, पर्यटन और शिक्षा जैसे 118 सेवा क्षेत्रों में भारत की पहुंच अब पहले से कहीं अधिक सुलभ होगी। भारत को कुशल कार्यबल के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में यह एक बड़ा कदम है।
सामाजिक-आर्थिक दृष्टिकोण से, यह एफटीए छोटे कारीगरों, महिलाओं और युवा उद्यमियों को वैश्विक पहचान दिलाने में सहायक होगा। एमएसएमई क्षेत्र को डिजिटल प्लेटफॉर्म और इनक्यूबेटर्स के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ा जाएगा। कृषि क्षेत्र में कॉफी, मसाले और अनाज के निर्यात को मिलने वाली गति सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था और किसानों की समृद्धि में योगदान देगी।
इंजीनियरिंग और ऑटोमोबाइल जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भी इस समझौते का व्यापक प्रभाव पड़ेगा। टैरिफ बाधाओं के हटने से उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और निवेश के नए रास्ते खुलेंगे। कुल मिलाकर, यह मुक्त व्यापार समझौता न केवल वर्तमान व्यापारिक घाटे को संतुलित करने की दिशा में प्रभावी है, बल्कि यह भविष्य के आत्मनिर्भर और वैश्विक भारत की नींव को भी मजबूत करता है।