प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में से एक, 594 किलोमीटर लंबे गंगा एक्सप्रेसवे का लोकार्पण किया। साढे़ तीन साल से भी कम समय में बनकर तैयार हुआ यह एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ को पूर्वी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज से सीधे जोड़ता है। इस विशाल परियोजना के लगभग 80 प्रतिशत हिस्से (464 किलोमीटर) का निर्माण अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड की इकाई, अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड (ARTL) द्वारा किया गया है, जबकि शेष भाग का विकास IRB इंफ्रास्ट्रक्चर ने किया है।
यह एक्सप्रेसवे पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए विकास के नए द्वार खोलने वाला साबित होगा। दशकों से आर्थिक रूप से पिछड़े रहे इस क्षेत्र को अब बेहतर कनेक्टिविटी और राज्य के अन्य विकसित हिस्सों से सीधा जुड़ाव मिलेगा। इस परियोजना की सबसे बड़ी उपलब्धि समय की बचत है; मेरठ से प्रयागराज के बीच की दूरी तय करने में अब 11 घंटे के बजाय केवल 6 घंटे का समय लगेगा। इससे न केवल आम यात्रियों को सुविधा होगी, बल्कि व्यापार और उद्योग जगत के लिए भी नए अवसर पैदा होंगे।
सुरक्षा और तकनीक के मामले में यह एक्सप्रेसवे आधुनिक मानकों पर आधारित है। सड़क दुर्घटनाओं को रोकने और सुगम यातायात सुनिश्चित करने के लिए यहाँ एआई (AI) आधारित कैमरा सिस्टम और एडवांस अलर्ट सिस्टम लगाए गए हैं। इसके अलावा, सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शाहजहांपुर जिले में 3.5 किलोमीटर लंबी इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) तैयार की गई है, जहाँ भारतीय वायुसेना के विमान आपात स्थिति में लैंड कर सकेंगे।
वर्तमान में छह लेन का यह एक्सप्रेसवे कुल 12 जिलों से होकर गुजरता है, जिसे भविष्य में आठ लेन तक बढ़ाया जा सकता है। इसके शुरू होने से बाजारों, अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों तक आम जनता की पहुँच सुगम होगी। निर्माण कार्य के दौरान अदाणी रोड ट्रांसपोर्ट लिमिटेड ने 12,000 से अधिक श्रमिकों को रोजगार दिया था। सरकार का अनुमान है कि यह एक्सप्रेसवे सालाना 25,000 से 30,000 करोड़ रुपये की लॉजिस्टिक्स बचत कराएगा और अगले एक दशक में राज्य की जीडीपी में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का योगदान देगा।
उत्तर प्रदेश सरकार एक्सप्रेसवे के रूट पर पड़ने वाले 12 जिलों में 11 औद्योगिक कॉरिडोर विकसित कर रही है। इससे करीब 3 लाख नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है। साथ ही, प्रयागराज और वाराणसी जैसे धार्मिक केंद्रों तक आसान पहुँच से आध्यात्मिक पर्यटन को बल मिलेगा। गढ़मुक्तेश्वर से लेकर त्रिवेणी संगम तक के प्रमुख पर्यटन स्थलों के जुड़ने से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी, जिससे लगभग 8 करोड़ लोगों को सीधा लाभ पहुँचने का अनुमान है।