हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित सड़क बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक तकनीक अपनाएगी सरकार: नितिन गडकरी

हिमालयी क्षेत्रों में सुरक्षित सड़क बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक तकनीक अपनाएगी सरकार: नितिन गडकरी

केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित “सुदृढ़ पहाड़ी सड़कों के लिए भूस्खलन शमन उपाय” कार्यशाला को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में उन्होंने पहाड़ी रास्तों को सुरक्षित बनाने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक समाधानों और अंतरराष्ट्रीय मानकों को लागू करने पर बल दिया। इस अवसर पर उनके साथ केंद्रीय राज्य मंत्री अजय टम्टा, हर्ष मल्होत्रा और विभाग के कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

संबोधन के दौरान गडकरी ने हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के निर्माण से जुड़ी जटिलताओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने स्पष्ट किया कि दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियां, अस्थिर ढलान और प्राकृतिक आपदाएं जैसे—भूस्खलन, बादल फटना और भूकंप, सड़क निर्माण के मार्ग में बड़ी बाधाएं हैं। मंत्री ने कहा कि इन चुनौतियों का सामना करने के लिए ऐसी सड़क अवसंरचना विकसित करना अनिवार्य है जो जलवायु परिवर्तनों के प्रति सहिष्णु और टिकाऊ हो।

सरकार ने भूस्खलन के खतरों को कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण संस्थागत समझौते किए हैं। गडकरी ने जानकारी दी कि टीएचडीसी इंडिया लिमिटेड, रक्षा भू-सूचना अनुसंधान संस्थान और भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के साथ विभिन्न एमओयू (MoU) पर हस्ताक्षर किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय रॉक मैकेनिक्स संस्थान के साथ मिलकर सुरंगों की सुरक्षा और भू-तकनीकी जांच की जा रही है ताकि निर्माण के दौरान जोखिमों का वैज्ञानिक तरीके से आकलन हो सके।

पहाड़ी क्षेत्रों में नई नीति के तहत अब सड़क बनाने से पहले ढलानों के स्थिरीकरण (स्लोप स्टेबलाइजेशन) को अनिवार्य प्राथमिकता दी जाएगी। इसके लिए आईआईटी रुड़की के सहयोग से वास्तविक समय की निगरानी और नए दिशानिर्देश तैयार किए जा रहे हैं। गडकरी ने बताया कि सर्वेक्षण कार्यों में अब एलआईडीएआर (LiDAR) और मानव रहित विमान (UAV) जैसी उन्नत तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है, जिससे सटीक आंकड़े जुटाने में मदद मिल रही है।

उत्तराखंड के सामरिक और धार्मिक महत्व वाले चारधाम मार्ग की सुरक्षा को लेकर भी विशेष उल्लेख किया गया। गडकरी ने बताया कि इस मार्ग पर आईएनएसएआर (InSAR) आधारित भूस्खलन निगरानी और ‘अर्ली वार्निंग सिस्टम’ (पूर्व चेतावनी प्रणाली) को क्रियान्वित किया जा रहा है। उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि केंद्र सरकार का लक्ष्य दूरस्थ क्षेत्रों में न केवल कनेक्टिविटी सुधारना है, बल्कि सुरक्षित और निर्बाध राजमार्गों के माध्यम से यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी है।

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