मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सोमवार को ग्वालियर में आयोजित ‘राज्य स्तरीय पशुपालक एवं दुग्ध उत्पादक सम्मेलन’ में शिरकत करते हुए मध्यप्रदेश को देश की ‘मिल्क कैपिटल’ बनाने का लक्ष्य रखा। उन्होंने कहा कि ग्वालियर की भूमि प्राचीन काल से ही गौपालन के लिए विख्यात रही है और अब सरकार पशुपालन व डेयरी क्षेत्र को ग्रामीण अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार बनाने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि पशुपालकों और दुग्ध उत्पादकों की आय में वृद्धि करना सरकार की प्राथमिकता है, ताकि युवा गांवों में ही स्वरोजगार पा सकें।
सम्मेलन के दौरान मुख्यमंत्री ने पशुपालकों के हित में कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए ग्वालियर में ‘पशु केयर एंड वेलनेस सेंटर’ खोलने, वर्तमान पशु स्वास्थ्य केंद्र का उन्नयन करने और डबरा में नया पशु चिकित्सालय स्थापित करने का ऐलान किया। साथ ही, विभिन्न योजनाओं के लाभार्थियों को हितलाभ वितरित किए गए। मुख्यमंत्री ने प्रदेश की लाल टिपारा आदर्श गौशाला की सराहना करते हुए उसे आत्मनिर्भरता का उत्कृष्ट उदाहरण बताया, जहाँ गोबर से जैविक खाद और सीएनजी का उत्पादन हो रहा है।
सरकार की आगामी योजनाओं पर प्रकाश डालते हुए डॉ. यादव ने बताया कि अब गौवंश के चारे के लिए दी जाने वाली सहायता राशि 20 रुपये से बढ़ाकर 40 रुपये कर दी गई है। प्रदेश के हर ब्लॉक में एक ‘वृंदावन ग्राम’ विकसित किया जा रहा है ताकि दुग्ध उत्पादन को वैज्ञानिक गति मिल सके। डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के साथ मिलकर काम किया जा रहा है। उन्होंने पशुपालकों को आश्वस्त किया कि सरकार उनसे सारा दूध खरीदेगी और उन्हें उचित मूल्य दिलाना सुनिश्चित करेगी।