फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान से टेलीफोन पर बातचीत कर होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) में जारी तनाव को कम करने पर जोर दिया है। मैक्रों ने स्पष्ट रूप से सभी संबंधित पक्षों से इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से नाकेबंदी को तत्काल और बिना किसी पूर्व शर्त के हटाने का आह्वान किया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के माध्यम से इस वार्ता की जानकारी साझा करते हुए मैक्रों ने क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव पर चिंता व्यक्त की और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के नागरिक बुनियादी ढांचे व जहाजों पर हुए हमलों की कड़े शब्दों में निंदा की।
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने नौवहन की स्वतंत्रता को प्राथमिकता देते हुए कहा कि संघर्ष पूर्व की स्थिति को स्थायी रूप से बहाल करना अनिवार्य है। उन्होंने विश्वास बहाली के लिए फ्रांस और ब्रिटेन द्वारा प्रस्तावित बहुराष्ट्रीय मिशन का सुझाव दिया, जो जहाज मालिकों और बीमा कंपनियों की आशंकाओं को दूर कर सके। मैक्रों ने स्पष्ट किया कि यह मिशन युद्धरत पक्षों से पूरी तरह स्वतंत्र होगा और इसमें विमान वाहक पोत ‘चार्ल्स डी गॉल’ की तैनाती एक प्रभावी भूमिका निभा सकती है। उन्होंने इस विषय पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से भी चर्चा करने की बात कही है।
मैक्रों के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य में शांति की बहाली न केवल समुद्री व्यापार के लिए जरूरी है, बल्कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम, बैलिस्टिक मिसाइल मुद्दों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर चल रही वार्ताओं को सकारात्मक दिशा देने में भी सहायक होगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि यदि शांति प्रक्रिया आगे बढ़ती है, तो प्रतिबंध हटाने की दिशा में यूरोपीय देश अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाएंगे।
यह कूटनीतिक पहल ऐसे समय में हुई है जब ‘एक्सियोस’ की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका और ईरान युद्ध समाप्ति के एक बड़े समझौते के बेहद करीब हैं। संभावित समझौते की शर्तों के तहत ईरान अपने परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पर रोक लगा सकता है, जिसके बदले में अमेरिका प्रतिबंधों में ढील देने और होर्मुज जलडमरूमध्य में आवाजाही को सामान्य करने पर सहमत हो सकता है।
उल्लेखनीय है कि ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच 40 दिनों के संघर्ष के बाद 8 अप्रैल को युद्धविराम हुआ था। हालांकि, इसके बाद पाकिस्तान में हुई शांति वार्ता का दौर बेनतीजा रहा था। पिछले कुछ हफ्तों से दोनों पक्षों के बीच लगातार प्रस्तावों का आदान-प्रदान हो रहा है और माना जा रहा है कि ईरान वर्तमान में एक नए शांति प्रस्ताव पर गंभीरता से विचार कर रहा है।