अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के समक्ष संघर्ष विराम का प्रस्ताव रखते हुए सख्त चेतावनी दी है कि यदि तेहरान इन शर्तों को स्वीकार नहीं करता, तो उसे अभूतपूर्व सैन्य हमले का सामना करना पड़ेगा। राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट किया कि शांति केवल उनकी निर्धारित शर्तों पर ही संभव है, अन्यथा ईरान को पहले से कहीं अधिक तीव्र आक्रमण के लिए तैयार रहना चाहिए।
अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर जारी एक संदेश में राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान प्रस्तावित शर्तों पर अपनी सहमति देता है, तो सैन्य अभियान “एपिक फ्यूरी” को पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि समझौते की स्थिति में होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटा ली जाएगी, जिससे ईरान सहित सभी देशों के जहाजों के लिए आवाजाही का मार्ग फिर से खुल सकेगा। हालांकि, उन्होंने सचेत किया कि प्रस्ताव अस्वीकार होने की स्थिति में बमबारी का नया दौर शुरू होगा, जो पिछले हमलों के मुकाबले कहीं अधिक विनाशकारी होगा।
यह बयान अमेरिका के उस ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अभियान पर रोक लगाने के बाद आया है, जिसका उद्देश्य होर्मुज में फंसे वाणिज्यिक जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालना था। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने पेंटागन में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए इस कदम को मानवता की रक्षा के लिए उठाया गया अनिवार्य कदम बताया। इससे पूर्व, विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी पुष्टि की थी कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ने अपने लक्ष्यों को सफलतापूर्वक प्राप्त कर लिया है और अब अमेरिका शांतिपूर्ण समाधान की ओर बढ़ना चाहता है।
उल्लेखनीय है कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल का एक संयुक्त सैन्य अभियान था, जिसकी शुरुआत 28 फरवरी 2026 को हुई थी। इस अभियान के तहत तेहरान के परमाणु केंद्रों और रणनीतिक सैन्य ठिकानों को बड़े पैमाने पर निशाना बनाया गया था। फिलहाल इस अभियान को सफल बताते हुए रोक दिया गया है, लेकिन ट्रंप के हालिया रुख ने स्पष्ट कर दिया है कि ईरान की असहमति इस युद्ध को दोबारा और अधिक तीव्रता के साथ भड़का सकती है।