साइबर अपराध पर वार: म्यूल खातों की पहचान के लिए I4C और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब के बीच समझौता

साइबर अपराध पर वार: म्यूल खातों की पहचान के लिए I4C और रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब के बीच समझौता

देश में बढ़ते साइबर वित्तीय अपराधों और डिजिटल भुगतान के सुरक्षित वातावरण को सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्यरत भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने रिज़र्व बैंक इनोवेशन हब (RBIH) के साथ एक रणनीतिक समझौता (MoU) किया है। मंगलवार को गृह मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य बैंकिंग प्रणाली में सक्रिय ‘म्यूल खातों’ (Mule Accounts) पर लगाम लगाना और साइबर धोखाधड़ी के खिलाफ सुरक्षा तंत्र को पहले से अधिक मजबूत बनाना है।

इस साझेदारी के तहत दोनों संस्थान धोखाधड़ी से संबंधित खुफिया जानकारी (intelligence sharing) साझा करेंगे और परिचालन स्तर पर आपसी समन्वय को बढ़ावा देंगे। समझौते का मुख्य केंद्र सक्रिय रूप से धोखाधड़ी की पहचान करना है, ताकि वित्तीय अपराध होने से पहले ही उन्हें रोका जा सके। विश्लेषणात्मक सहायता और डेटा साझाकरण के माध्यम से बैंकिंग इकोसिस्टम में छिपे जोखिमों का आकलन किया जाएगा, जिससे डिजिटल लेनदेन को और अधिक विश्वसनीय बनाया जा सके।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस कदम को ‘साइबर सुरक्षित भारत’ की दिशा में एक बड़ी उपलब्धि बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए उन्होंने कहा कि म्यूल खाते साइबर अपराधों को रोकने के मार्ग में एक बड़ी चुनौती रहे हैं। शाह के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की शक्ति का उपयोग करते हुए यह समझौता साइबर धोखाधड़ी के विरुद्ध एक ‘नेक्स्ट-जेन शील्ड’ (अगली पीढ़ी का सुरक्षा कवच) तैयार करेगा।

इस तकनीकी समन्वय के जरिए I4C की ‘सस्पेक्ट रजिस्ट्री’ (Suspect Registry) से प्राप्त डेटा को AI-संचालित प्रणालियों में फीड किया जाएगा। इससे संदिग्ध पहचानकर्ताओं और म्यूल खातों का तेजी से पता लगाना और उन्हें बैंकिंग प्रणाली से हटाना संभव होगा। विशेष रूप से, ‘MuleHunter.ai™’ जैसे एआई-आधारित मॉडलों को इस डेटा के माध्यम से और अधिक सटीक बनाया जाएगा, ताकि वे संदिग्ध गतिविधियों का सटीक आकलन कर सकें।

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