मिडल ईस्ट (मध्य पूर्व) में बढ़ते तनाव और जेट ईंधन की आसमान छूती कीमतों के कारण एयर इंडिया ने जून महीने से अपनी कई अंतरराष्ट्रीय सेवाओं को निलंबित करने का बड़ा फैसला लिया है। एयरलाइन की यह कटौती अगले तीन महीनों तक प्रभावी रहेगी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, परिचालन की उच्च लागत और वित्तीय दबाव को कम करने के लिए एयरलाइन ने विशेष रूप से दिल्ली से संचालित होने वाले कई प्रमुख रूटों पर अपनी सेवाएं सीमित कर दी हैं।
रूट्स के विवरण के मुताबिक, राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से शिकागो, नेवार्क, सिंगापुर और शंघाई जैसे महत्वपूर्ण गंतव्यों के लिए उड़ानों की संख्या कम कर दी गई है। इसके अतिरिक्त, सैन फ्रांसिस्को, पेरिस और टोरंटो के लिए संचालित होने वाली उड़ानों के शेड्यूल में भी कटौती की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, एयर इंडिया ने कुल मिलाकर अपने दैनिक परिचालन से लगभग 100 उड़ानों को कम करने का निर्णय लिया है। पिछले सप्ताह ही एयरलाइन के सीईओ कैंपबेल विल्सन ने संकेत दिया था कि भू-राजनीतिक अस्थिरता और ईंधन व्यय के कारण अंतरराष्ट्रीय परिचालन में कमी जारी रह सकती है।
वित्तीय चुनौतियों के साथ-साथ एयरलाइन ने अपने आंतरिक प्रशासन को भी सख्त किया है। पिछले तीन वर्षों के दौरान एयर इंडिया ने नीतिगत उल्लंघन और अनैतिक गतिविधियों में संलिप्त रहने के कारण 1,000 से अधिक कर्मचारियों को सेवा से बर्खास्त किया है। सीईओ विल्सन ने हाल ही में एक टाउन हॉल बैठक में खुलासा किया कि बर्खास्त किए गए कर्मचारी एम्प्लॉई लीजर ट्रैवल (ईएलटी) प्रणाली का दुरुपयोग, विमान से सामान की तस्करी और बिना शुल्क लिए अतिरिक्त सामान ले जाने देने जैसे गंभीर कदाचार में शामिल पाए गए थे।
एयरलाइन का यह सख्त कदम उस समय आया है जब एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस सहित पूरा समूह भारी घाटे से गुजर रहा है। एक अनुमान के अनुसार, मार्च 2026 को समाप्त होने वाले वित्तीय वर्ष तक एयर इंडिया समूह को 22,000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो सकता है। टाटा समूह के नेतृत्व में चल रहे पुनर्गठन प्रयासों के तहत एयरलाइन ने वेतन वृद्धि रोकने और गैर-जरूरी खर्चों में कटौती जैसे कड़े उपाय लागू किए हैं ताकि राजकोषीय स्थिति को संभाला जा सके।