भोपाल के रवीन्द्र भवन में शुक्रवार को आयोजित ‘नर्मदा चिंतन बौद्धिक संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश में जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए राज्य सरकार के साथ-साथ आम जनता भी पूरी निष्ठा से जुटी हुई है। सामूहिक प्रयासों के बल पर ही मध्यप्रदेश केंद्र सरकार के जल संरक्षण और जन संचयन मानकों में देश के शीर्ष राज्यों में शामिल हो सका है। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने नर्मदा मिशन जैसी संस्थाओं के कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि वे पानी बचाने के प्रति समाज को जागरूक करने का उत्कृष्ट कार्य कर रही हैं। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री और विशिष्ट अतिथियों ने परिसर में लगाई गई स्वदेशी उत्पादों की प्रदर्शनी का निरीक्षण भी किया, जहां बाल कलाकार विक्रम लोधी ने मुख्यमंत्री को मां नर्मदा का एक चित्र भेंट किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने संगोष्ठी में जानकारी दी कि पूरे प्रदेश में कुओं, बावड़ियों, पोखरों और नहरों सहित तमाम पारंपरिक जल संरचनाओं के कायाकल्प का कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। उन्होंने बताया कि गुड़ी पड़वा से शुरू हुआ ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ आगामी 30 जून तक लगातार संचालित किया जाएगा। इस दीर्घकालिक अभियान का मुख्य लक्ष्य अनुपयोगी हो चुके जल स्रोतों को पुनर्जीवित करना और पानी की महत्ता को लेकर जन-जागृति का विस्तार करना है। इस अभियान को समाज के हर वर्ग का भरपूर समर्थन मिला है, जिसके चलते कई लोक उत्सव भी शासन और जनता ने मिलकर मनाए हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विकास के साथ-साथ विरासत को सहेजने के संकल्प को मध्यप्रदेश पूरी तरह धरातल पर उतार रहा है।
समारोह में उपस्थित पंचायत और ग्रामीण विकास मंत्री श्री प्रहलाद सिंह पटेल ने बताया कि उनका विभाग नदियों के उद्गम स्थलों के निरीक्षण और उनकी निरंतरता बनाए रखने के लिए लगातार सक्रिय है। इन प्रयासों को जनता का भी अभूतपूर्व सहयोग मिल रहा है। वहीं, वरिष्ठ राष्ट्रवादी विचारक श्री गोपाल आर्य ने अपने संबोधन में पर्यावरण रक्षा के लिए प्राणों की आहुति देने वाली अमृता देवी का स्मरण करते हुए कहा कि जब साधक और शासक मिलकर समाज के कल्याण के लिए काम करते हैं, तो उसके परिणाम हमेशा श्रेष्ठ और दूरगामी होते हैं।
इस बौद्धिक संगोष्ठी में अध्यात्म और सामाजिक सरोकारों का भी अनूठा संगम देखने को मिला। पूज्य दादा गुरु भगवान ने अपने प्रवचन के माध्यम से उपस्थित जनसमुदाय का मार्गदर्शन किया। इस दौरान मुख्यमंत्री और दादा गुरु ने लेखक स्मित अपराजिता की नवनिर्मित पुस्तक “समर्थ दृष्टि: साधना के शिखर” का विमोचन किया। साथ ही, समाज में उत्कृष्ट योगदान देने वाले नागरिकों को ‘समर्थ नर्मदा अलंकरण’ से सम्मानित किया गया। दादा गुरु ने अपने संबोधन में कहा कि भारतीय संस्कृति ने संपूर्ण विश्व को जीवन का दर्शन दिया है। वर्तमान में प्रकृति हमें संकेत दे रही है कि हम सब मिलकर पर्यावरण के प्रति सचेत हों। गंगा, यमुना और नर्मदा जैसी नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि साक्षात शक्तियां हैं। उन्होंने प्रदेश में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान की खुलकर सराहना की।
कार्यक्रम के अंत में मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के उपाध्यक्ष श्री मोहन नागर ने जनसहयोग से संचालित की जा रही जल संरचनाओं के जीर्णोद्धार कार्यों की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत की। इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में खेल मंत्री श्री विश्वास सारंग, राज्यसभा सांसद श्रीमती माया नारोलिया और विधायक श्री भगवानदास सबनानी सहित कई प्रमुख जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।