डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.53 पर पहुंचा रुपया

डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर 96.53 पर पहुंचा रुपया

भारतीय मुद्रा रुपया मंगलवार, 19 मई को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ऐतिहासिक रूप से कमजोर होकर 96.53 के स्तर पर आ गया है। इस कारोबारी सत्र में रुपये में 24 पैसे की भारी गिरावट दर्ज की गई। गौरतलब है कि पिछले कारोबारी दिन, सोमवार को रुपया 96.29 पर बंद हुआ था। वर्ष 2026 की शुरुआत से ही भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है, जबकि दिसंबर 2025 में इसने पहली बार 90 का मनोवैज्ञानिक स्तर पार किया था। विशेषज्ञों के अनुसार, रुपये में जारी इस गिरावट से देश में महंगाई बढ़ने का गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

बाजार विश्लेषकों का अनुमान है कि यदि कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में तेजी बनी रहती है और पश्चिम एशिया का भू-राजनीतिक तनाव कम नहीं होता है, तो निकट भविष्य में रुपया 100 के स्तर तक भी गिर सकता है। वर्तमान में रुपये की इस कमजोरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय और घरेलू कारक प्रमुखता से जिम्मेदार हैं।

मिडिल ईस्ट में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर निवेश को लेकर अनिश्चितता व्याप्त है। इस डरे हुए माहौल में विदेशी निवेशक भारतीय बाजार जैसे उभरते बाजारों से अपनी पूंजी निकाल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, ब्रेंट क्रूड की कीमतें 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का 85 प्रतिशत से अधिक आयात करता है, जिसके कारण तेल महंगा होने से आयात बिल में भारी बढ़ोतरी हुई है और डॉलर की मांग बढ़ गई है।

होर्मुज स्ट्रेट, जो खाड़ी देशों से तेल आपूर्ति का मुख्य मार्ग है, वहां जारी बाधाओं ने आपूर्ति श्रृंखला को बुरी तरह प्रभावित किया है। साथ ही, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) द्वारा भारतीय बाजारों में की जा रही लगातार बिकवाली भी रुपये पर दबाव बना रही है। जब ये निवेशक अपना पैसा निकालकर उसे डॉलर में परिवर्तित करते हैं, तो रुपये की वैल्यू कम होती जाती है। वैश्विक स्तर पर डॉलर इंडेक्स की मजबूती और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में हुई वृद्धि भी निवेशकों को डॉलर की ओर आकर्षित कर रही है।

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