केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने मंगलवार को जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के मंच से दुनिया को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत में डिजिटल स्वास्थ्य नवाचारों, सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य एकजुटता के प्रति देश के संकल्प को दोहराया। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार ‘सभी के लिए स्वास्थ्य’ के मूल सिद्धांत पर काम करते हुए एक ऐसी समावेशी स्वास्थ्य प्रणाली का निर्माण कर रही है, जिसके केंद्र में आम नागरिक हैं।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर “वैश्विक स्वास्थ्य को नया स्वरूप देना: एक साझा जिम्मेदारी” विषय पर अपने विचार साझा करते हुए जेपी नड्डा ने कहा कि भारत पूरी सरकार और पूरे समाज की भागीदारी (समग्र-सरकार और समग्र-समाज दृष्टिकोण) से काम कर रहा है। इसी रणनीति के तहत देश के हर नागरिक तक सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सीय सुविधाएं पहुंचाई जा रही हैं। उन्होंने भरोसा जताया कि भारत बहुत जल्द सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज के अपने लक्ष्य को हासिल कर लेगा।
देश के भीतर बुनियादी स्वास्थ्य ढांचे में सुधार का ब्यौरा देते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अब तक देश के विभिन्न हिस्सों में 1,85,000 से अधिक ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ क्रियाशील किए जा चुके हैं। इन केंद्रों का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को उनके घर और समुदाय के निकट ही प्राथमिक उपचार और व्यापक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही भारत भविष्य में आने वाले किसी भी सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट या आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए अपनी तैयारियों को लगातार पुख्ता कर रहा है।
स्वास्थ्य के क्षेत्र में आधुनिक तकनीक और डिजिटल बदलावों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि ‘आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन’ देश में एक मजबूत डिजिटल हेल्थ इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। इसके अंतर्गत अब तक 88 करोड़ (880 मिलियन) से ज्यादा विशिष्ट डिजिटल स्वास्थ्य पहचान पत्र (यूनिक डिजिटल हेल्थ आईडी) जारी किए जा चुके हैं। यह तकनीक मरीजों के पुराने स्वास्थ्य रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने और बिना किसी बाधा के निरंतर इलाज सुनिश्चित करने में बेहद मददगार साबित हो रही है।
नड्डा ने अपने संबोधन में दुनिया की सबसे बड़ी स्वास्थ्य बीमा योजना ‘आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना’ की सफलता को भी रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि यह योजना वर्तमान में लगभग 60 करोड़ (600 मिलियन) लाभार्थियों को सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है, जिसका सीधा फायदा समाज के सबसे वंचित और कमजोर तबकों को मिल रहा है। इसके अतिरिक्त, चिकित्सा क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर बात करते हुए उन्होंने भारत की नई ‘स्वास्थ्य सेवा में एआई रणनीति’ का जिक्र किया और कहा कि एआई की भविष्य की दिशा पूरी तरह से नैतिक सिद्धांतों और मानव-केंद्रित प्रणालियों पर टिकी होनी चाहिए।
वैश्विक स्तर पर भारत के योगदान की सराहना करते हुए स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि भारत आज भी सस्ती जेनेरिक दवाओं और टीकों के निर्माण में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने कोविड-19 संकट के दौरान चलाई गई ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल की याद दिलाई, जिसके तहत भारत ने दुनिया के करीब 100 देशों को 30 करोड़ (300 मिलियन) के आसपास वैक्सीन की खुराकें भेजी थीं। नड्डा ने अंत में वैश्विक समुदाय से अपील की कि एक स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य के निर्माण के लिए सभी देशों को साझा जिम्मेदारी और आपसी एकजुटता के साथ अपनी नीतियों को धरातल पर उतारना होगा।