मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य के चिकित्सा और स्वास्थ्य ढांचे को सुदृढ़ करने के लिए चल रही निर्माण परियोजनाओं की गति बढ़ाने का फैसला किया है। मंत्रालय में आयोजित समीक्षा बैठक में प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने मध्य प्रदेश भवन विकास निगम के माध्यम से बन रहे मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों के सुदृढ़ीकरण कार्यों का ब्यौरा लिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि बुनियादी ढांचे के निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। उप मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि फाइलों और तकनीकी व आर्थिक मामलों को बिना देरी के आगे बढ़ाया जाए ताकि धरातल पर काम प्रभावित न हो और जनता को त्वरित इलाज मिल सके।
बैठक में प्रस्तुत रिपोर्ट के मुताबिक, प्रदेश में कुल ₹4,293 करोड़ की लागत से 92 विभिन्न स्वास्थ्य परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनमें अब तक कुल 67.59 प्रतिशत वित्तीय प्रगति दर्ज की गई है। केंद्र और राज्य सरकार के साझा सहयोग से चल रही ₹446 करोड़ 50 लाख की 24 परियोजनाओं में से 4 का निर्माण कार्य पूरा किया जा चुका है। बची हुई परियोजनाओं में से 8 को चालू माह यानी मई में, 7 को जुलाई में तथा 2 अन्य को अगस्त से अक्टूबर की अवधि में पूरा करने की समय-सीमा तय की गई है। इन कार्यों में वित्तीय प्रगति का आंकड़ा 32.2 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
इसके अतिरिक्त, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम), ईसीआरपी और पीएम-अभिम योजनाओं के अंतर्गत मंजूर की गई 51 परियोजनाओं पर भी चर्चा हुई। इनमें से 49 विकास कार्यों को निविदा और कार्यादेश जारी होने के बाद धरातल पर शुरू किया जा चुका है, जिनमें से 15 परियोजनाओं को आगामी नवंबर और दिसंबर तक पूरा करने का अनुमान है। बैठक के दौरान यह बात सामने आई कि धार में सीसीएचबी परियोजना और मैहर जिला चिकित्सालय के लिए अभी जमीन फाइनल नहीं हो सकी है। इस पर उप मुख्यमंत्री ने विभागीय अधिकारियों को स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर भूमि संबंधी अड़चनों को जल्द सुलझाने का निर्देश दिया।
चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी योजनाओं की बात करें तो राज्य सरकार के बजट से कुल 17 परियोजनाएं स्वीकृत हैं, जिनकी कुल प्रशासनिक मंजूरी राशि ₹2,780 करोड़ 2 लाख है। इनमें से 15 महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर तकनीकी मंजूरी के बाद धरातल पर काम चल रहा है, जिसने 76.28 प्रतिशत की वित्तीय प्रगति हासिल कर ली है। उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल ने समीक्षा के दौरान सिंगरौली में नर्सिंग कॉलेज के निर्माण हेतु भूमि का आवंटन कराने और मंडला में नर्सिंग कॉलेज की डीपीआर को बिना विलंब तैयार करने के आदेश जारी किए।
राज्य के प्रमुख शहरों में चल रहे बड़े निर्माण कार्यों की भौतिक प्रगति की भी समीक्षा की गई। इसके तहत सीहोर के बुधनी में ₹714.91 करोड़ की लागत से बन रहे नवीन मेडिकल कॉलेज और 500 बेड के अस्पताल का निर्माण कार्य 88.44 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उज्जैन चिकित्सा महाविद्यालय की परियोजना ₹592.30 करोड़ से संचालित है, जिसका 42.86 प्रतिशत कार्य हो गया है। इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल के कायाकल्प पर ₹773.07 करोड़ और रीवा के श्यामशाह मेडिकल कॉलेज में ओपीडी व मैटरनिटी ब्लॉक सहित विभिन्न कार्यों पर ₹321.94 करोड़ खर्च किए जा रहे हैं। वहीं, मंडला के नए मेडिकल कॉलेज का काम ₹249.63 करोड़ की लागत से 42 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है। इस उच्च स्तरीय बैठक में लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के आयुक्त धनराजू एस, एमपीबीडीसी के प्रबंध संचालक सिबी चक्रवर्ती और एमपीपीएचएससीएल के प्रबंध संचालक मयंक अग्रवाल सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।