भारतीय नौसेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में बुधवार को एक बड़ा कदम उठाया गया, जब कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में आधुनिक तकनीक से लैस नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल ‘संघमित्रा’ को लॉन्च किया गया। ‘यार्ड 3039’ के नाम से पहचाने जाने वाले इस नए युद्धपोत का जलावतरण मुख्य अतिथि सरिता वात्सायन द्वारा किया गया। इस गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण के दौरान नौसेना के उप प्रमुख वाइस एडमिरल संजय वात्सायन के साथ रक्षा मंत्रालय, भारतीय नौसेना और जीआरएसई के कई वरिष्ठ सैन्य और प्रशासनिक अधिकारी वहां मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम को नौसैनिक परंपराओं, रीती-रिवाजों और पूर्ण सैन्य सम्मान के साथ संपन्न किया गया।
यह नया युद्धपोत देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा के लिए तैयार किए जा रहे कुल 11 नेक्स्ट जेनरेशन ऑफशोर पेट्रोल वेसल्स (एनजीओपीवी) की श्रृंखला का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। भारतीय नौसेना की रक्षा जरूरतों को पूरा करने के लिए इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना पर दो प्रमुख स्वदेशी शिपयार्ड मिलकर काम कर रहे हैं। इन सभी जहाजों के निर्माण की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से गोवा शिपयार्ड लिमिटेड (जीएसएल) और कोलकाता के जीआरएसई को सौंपी गई है, जहां इनका निर्माण कार्य समानांतर रूप से तेजी से चल रहा है।
पूरी तरह से भारतीय तकनीक और घरेलू स्तर पर डिजाइन किए गए ये युद्धपोत बहुआयामी भूमिका निभाने में सक्षम हैं। नौसेना के बेड़े में शामिल होने के बाद इनका उपयोग समुद्री सीमाओं की कड़ा पहरेदारी करने, संकट के समय खोज और बचाव अभियान चलाने के साथ-साथ समुद्र में देश की कीमती संपत्तियों की सुरक्षा के लिए किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, ये जहाज प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता पहुंचाने और गहरे समुद्र में पनपने वाली समुद्री डकैती जैसी अवैध गतिविधियों को रोकने में भी बेहद कारगर साबित होंगे।
इस युद्धपोत के नाम और इसके प्रतीक चिन्ह का एक विशेष ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व है। इसका नाम ‘संघमित्रा’ महान मौर्य सम्राट अशोक की पुत्री के नाम पर रखा गया है। वहीं इसके आधिकारिक प्रतीक चिन्ह में खगोलीय महत्व के सप्तऋषि तारामंडल के साथ-साथ सुरक्षा और मार्गदर्शन के प्रतीक के रूप में लाल और सफेद रंग के लाइटहाउस (प्रकाश स्तंभ) को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया है।
भारतीय नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने इस सफल लॉन्चिंग को देश के रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की ओर एक और मील का पत्थर करार दिया है। नौसेना के अनुसार, घरेलू स्तर पर युद्धपोतों के निर्माण की यह सफलता न केवल देश की सैन्य क्षमता को बढ़ाती है, बल्कि केंद्र सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ जैसे बड़े अभियानों को जमीन पर सच कर दिखाने की दिशा में भी एक बहुत बड़ी कामयाबी है।