भारत ने 22 मई (शुक्रवार) को रक्षा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए कम दूरी की मारक क्षमता वाली ‘अग्नि-1’ बैलिस्टिक मिसाइल का सफल प्रायोगिक परीक्षण किया। रक्षा मंत्रालय से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, यह परीक्षण ओडिशा के चांदीपुर में स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज से सफलतापूर्वक संचालित किया गया, जिसने देश की सैन्य ताकत को और अधिक सुदृढ़ बनाया है।
रणनीतिक बल कमान (एसएफसी) की देखरेख में आयोजित इस परीक्षण के दौरान मिसाइल के तमाम तकनीकी और परिचालन संबंधी मानदंडों को परखा गया, जो पूरी तरह सटीक पाए गए। रक्षा मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि स्वदेशी तकनीक से विकसित अग्नि मिसाइल शृंखला का यह संस्करण भारत की रक्षा तैयारियों का एक मुख्य आधार है। यह मिसाइल कम दूरी पर मौजूद दुश्मनों के ठिकानों को अचूक सटीकता से भेदने की क्षमता रखती है, जिससे देश की सामरिक प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है।
उड़ान के दौरान इस बैलिस्टिक मिसाइल ने निर्धारित किए गए सभी लक्ष्यों को सफलतापूर्वक हासिल किया। रक्षा क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि इस परीक्षण की सफलता ने भारतीय मिसाइल प्रणालियों की विश्वसनीयता और सेना की तैयारियों को एक बार फिर साबित किया है।
गौरतलब है कि इसी महीने 8 मई 2026 को भारत ने ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से एक और अत्याधुनिक अग्नि मिसाइल का कामयाब परीक्षण किया था। उस मिसाइल की सबसे बड़ी खासियत यह थी कि वह एमआईआरवी (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टार्गेटेड री-एंट्री व्हीकल) तकनीक से लैस थी।
एमआईआरवी तकनीक की मदद से एक ही मिसाइल के जरिए विभिन्न दिशाओं में स्थित कई लक्ष्यों पर एक साथ निशाना साधा जा सकता है। रक्षा सूत्रों के अनुसार, मई की शुरुआत में हुए उस परीक्षण के दौरान मिसाइल ने कई पेलोड (हथियारों) के साथ उड़ान भरी थी और हिंद महासागर में अलग-अलग स्थानों पर तय किए गए निशानों को सटीकता से ध्वस्त किया था।
सैन्य मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह के लगातार सफल परीक्षण देश की मजबूत राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा अनुसंधान की प्रगति और तकनीकी आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करते हैं। ये कदम भारत की ‘विश्वसनीय न्यूनतम प्रतिरोधक क्षमता’ (क्रेडिबल मिनिमम डिटरेंस) की नीति को और अधिक पुख्ता बनाने की दिशा में बेहद महत्वपूर्ण हैं।