भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी के नए युग का आगाज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

भारत और साइप्रस के बीच रणनीतिक साझेदारी के नए युग का आगाज़: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी

नई दिल्ली में आयोजित एक संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साइप्रस गणराज्य के राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स की मौजूदगी में दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को भविष्योन्मुखी और बेहद मजबूत बताया। पीएम मोदी ने रेखांकित किया कि भारत और साइप्रस के रिश्ते लोकतांत्रिक मूल्यों की साझी विरासत, कानून के प्रति अटूट निष्ठा तथा एक-दूसरे की संप्रभुता व प्रादेशिक अखंडता के सम्मान जैसे सुदृढ़ सिद्धांतों पर टिके हुए हैं।

राष्ट्रपति निकोस क्रिस्टोडौलाइड्स और उनके साथ आए प्रतिनिधिमंडल का भारत आगमन पर गर्मजोशी से स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री ने अपनी पुरानी यादों को साझा किया। उन्होंने कहा कि पिछले साल अपनी साइप्रस यात्रा के दौरान वहां मिले अभूतपूर्व सत्कार और ‘साइप्रस के सर्वोच्च सम्मान’ से नवाजे जाने की स्मृतियां उनके मन में सदैव ताजा रहेंगी। उन्होंने राष्ट्रपति की इस भारत यात्रा को दोनों देशों के ऐतिहासिक सफर का एक मील का पत्थर करार दिया।

वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों की स्थिति स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और यूरोप के बीच संबंध इस समय एक नए और स्वर्णिम अध्याय की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण समय में साइप्रस न केवल यूरोपीय संघ परिषद की कमान संभाल रहा है, बल्कि वह भारत और यूरोप के मध्य निवेश के एक प्रमुख प्रवेश द्वार के रूप में भी स्थापित हो चुका है। भारत के शीर्ष दस निवेशकों की सूची में साइप्रस का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है और बीते दस वर्षों के भीतर वहां से आने वाले निवेश में करीब दोगुनी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

आर्थिक मोर्चे पर भविष्य की योजनाओं का खाका खींचते हुए पीएम मोदी ने जानकारी दी कि भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से सहयोग के नए रास्ते खुले हैं। दोनों राष्ट्रों ने आगामी पांच वर्षों में आपसी निवेश को एक बार फिर दोगुना करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इसी दूरगामी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए भारत और साइप्रस ने आपसी राजनयिक संबंधों को अब ‘रणनीतिक साझेदारी’ के सर्वोच्च स्तर पर पहुंचा दिया है।

इस नई रणनीतिक साझीदारी के तहत वित्तीय और सेवा क्षेत्रों को आपस में जोड़कर व्यापार की असीम संभावनाएं तलाशी जाएंगी। प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि इससे साइप्रस के बुनियादी ढांचे (इन्फ्रास्ट्रक्चर), ऊर्जा और कृषि क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी बढ़ेगी, जबकि भारत के तेजी से विकसित हो रहे नौवहन (शिपिंग) और समुद्री (मैरीटाइम) क्षेत्रों में विदेशी निवेश आकर्षित होगा। इसके अलावा, दोनों देश गुजरात की ‘गिफ्ट सिटी’ को एक अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व सेवा केंद्र के रूप में विकसित करने के लिए मिलकर प्रयास करेंगे, साथ ही एक-दूसरे के स्टार्टअप और नवाचार (इनोवेशन) इकोसिस्टम को बढ़ावा देंगे।

सुरक्षा के मोर्चे पर बात करते हुए प्रधानमंत्री ने रक्षा सहयोग को आपसी रिश्तों का एक मुख्य आधार बताया। उन्होंने कहा कि हालिया दौर में दोनों देशों की सेनाओं के बीच प्रशिक्षण और विचारों का आदान-प्रदान काफी बढ़ा है। इसी क्रम में अब साइबर सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा और आतंकवाद के खिलाफ मोर्चेबंदी को और अधिक सुदृढ़ करने का साझा संकल्प लिया गया है। इसके साथ ही, हिंद-प्रशांत महासागर पहल (इंडो-पैसिफिक ओशंस इनिशिएटिव) और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक कॉरिडोर (आईएमईईसी) जैसी वैश्विक कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी दोनों देश मिलकर आगे बढ़ेंगे।

अंत में, साइप्रस में निवास कर रहे भारतीय पेशेवरों और विद्यार्थियों की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ये लोग दोनों देशों को आपस में जोड़ने वाले जीवंत सेतु हैं। जन-आवाजाही को सरल बनाने के लिए जल्द ही दोनों पक्ष व्यापक प्रवासन एवं गतिशीलता साझेदारी (माइग्रेशन एवं मोबिलिटी पार्टनरशिप) और सामाजिक सुरक्षा समझौते की दिशा में कदम बढ़ाएंगे। इसके अतिरिक्त, वार्ता के दौरान यूक्रेन संकट और पश्चिम एशिया के हालातों सहित कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर गंभीर विमर्श हुआ, जहां दोनों देशों ने विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और वैश्विक संस्थाओं में सुधार की आवश्यकता पर एक समान रुख प्रकट किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *