अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को नई दिल्ली में भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ एक संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने भारत को अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदारों में से एक बताया। रूबियो ने रेखांकित किया कि दोनों लोकतांत्रिक देश क्रिटिकल मिनरल्स (महत्वपूर्ण खनिज), सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) और आतंकवाद जैसे प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर एक जैसी सोच रखते हैं।
साझा प्रेस वार्ता के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री ने आतंकवाद के मुद्दे पर दोनों देशों की समान चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि भारत और अमेरिका दोनों ही वैश्विक आतंकी नेटवर्कों का शिकार रहे हैं, जिसके कारण दोनों देशों के बीच आतंकवाद-विरोधी मोर्चे पर सहयोग काफी मजबूत है। इसके साथ ही उन्होंने लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता के प्रति जवाबदेही और सार्वजनिक निगरानी की भूमिका को बेहद अहम माना।
लोकतांत्रिक मूल्यों की चर्चा करते हुए रूबियो ने कहा कि अमेरिका में उन्हें और राष्ट्रपति को अपने हर फैसले का हिसाब देश की जनता को देना होता है। उन्हें यह साबित करना पड़ता है कि कोई भी निर्णय देश के हित में कैसे है। भारत में भी नेतृत्व को यही प्रक्रिया अपनानी होती है, जहां उन्हें नागरिकों को यह समझाना पड़ता है कि अमेरिका के साथ संबंध या किसी वैश्विक मुद्दे पर लिया गया स्टैंड देश के लिए किस तरह फायदेमंद है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक देशों में यह जवाबदेही विशेष रूप से दिखाई देती है।
उन्होंने आगे कहा कि लोकतंत्र के भीतर सरकार सीधे नागरिकों के प्रति उत्तरदायी होती है। इन व्यवस्थाओं में विपक्ष की मौजूदगी के साथ-साथ एक स्वतंत्र मीडिया तंत्र भी काम करता है। भारत का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि यहां मीडिया का बड़ा दायरा है, जिसका अर्थ है फैसलों की अधिक बारीकी से जांच होना। यही लोकतांत्रिक प्रक्रिया दोनों देशों के हितों को एक सूत्र में बांधती है, क्योंकि दोनों पक्ष जानते हैं कि हर कदम को जनता के समक्ष सही साबित करना अनिवार्य है।
मार्को रूबियो ने स्पष्ट किया कि भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंध महज किसी एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। इक्कीसवीं सदी की चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण खनिजों और निर्बाध आपूर्ति श्रृंखलाओं तक पहुंच दोनों देशों के लिए प्राथमिकता है, क्योंकि किसी एक ही स्रोत पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा है। हिंद-प्रशांत क्षेत्र और होर्मुज जलडमरूमध्य के मौजूदा हालातों सहित कई वैश्विक घटनाक्रमों पर दोनों देशों के रणनीतिक हित आपस में जुड़े हुए हैं।
अपनी इस भारत यात्रा को बेहद शानदार बताते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि यह साझेदारी व्यापक स्तर पर साझा हितों पर टिकी है। दुनिया के दो बड़े लोकतंत्र होने के नाते दोनों देशों के संबंध समान मूल्यों पर आधारित हैं, जहां राजनीतिक नेतृत्व को अंततः जनता की अदालत में जवाब देना होता है। तकनीकी सहयोग पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीकों के फायदों और खतरों के बीच संतुलन बनाना इस सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में शामिल है।