जल संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों के बीच मध्यप्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से जल सुरक्षा को मिल रही नई दिशा

जल संरक्षण के राष्ट्रीय प्रयासों के बीच मध्यप्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ से जल सुरक्षा को मिल रही नई दिशा

भारतीय संस्कृति में जीवनदायिनी मानी जाने वाली गंगा नदी के पृथ्वी पर अवतरण के उपलक्ष्य में ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को गंगा दशहरा (गंगा दशमी) का पर्व मनाया जाता है। पानी के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने वाले इस पर्व के मूल महत्व को रेखांकित करते हुए केंद्र सरकार ने देश में जल संरक्षण को एक व्यापक जन आंदोलन का रूप दिया है। इसी कड़ी में प्राकृतिक जल संसाधनों से समृद्ध मध्यप्रदेश राज्य में भी जल स्रोतों के संरक्षण और पुनर्जीवन के उद्देश्य से ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को पूरी प्रतिबद्धता के साथ संचालित किया जा रहा है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल को देश के विकास का मुख्य मानक माना गया है। इसके लिए जल शक्ति मंत्रालय की स्थापना के साथ-साथ जल जीवन मिशन, नमामी गंगे, अमृत सरोवर मिशन और जल शक्ति अभियान जैसी दूरगामी पहलों की शुरुआत की गई। ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ के अंतर्गत शुरू किए गए अमृत सरोवर मिशन के तहत देश के हर जिले में 75 जलाशयों के निर्माण या जीर्णोद्धार का लक्ष्य तय किया गया था, जिसके तहत अब तक 70 हजार से अधिक अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं। इन सरोवरों से वर्षा जल संचयन और भूजल पुनर्भरण में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। इसके साथ ही नमामी गंगे परियोजना के माध्यम से सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट, रिवर फ्रंट विकास और जैव विविधता के संरक्षण पर काम किया जा रहा है।

कृषि क्षेत्र में पानी के कुशल उपयोग के लिए ‘प्रति बूंद अधिक फसल’ (पर ड्रॉप मोर क्रॉप) के सिद्धांत पर ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके अतिरिक्त ‘कैच द रेन’ अभियान ने वर्षा जल संचयन को जन-जन की जिम्मेदारी बना दिया है। प्रधानमंत्री के इन प्रयासों के परिणामस्वरूप देश में अत्यधिक दोहन वाली जल इकाइयों की संख्या में कमी आई है और भूजल स्तर में सुधार देखा गया है। सरकार का उद्देश्य नई जल संरचनाओं के निर्माण के साथ-साथ भावी पीढ़ी को ‘वाटर वॉरियर्स’ के रूप में तैयार करना है, ताकि जल संरक्षण देश की संस्कृति का हिस्सा बन सके।

इसी राष्ट्रीय विजन का अनुसरण करते हुए मध्यप्रदेश में ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ को एक राज्य स्तरीय जन आंदोलन के रूप में चलाया जा रहा है। वर्ष 2025 में यह अभियान 19 मार्च से 30 जून तक आयोजित किया गया था, और वर्तमान वर्ष 2026 में भी इसे पूरी सक्रियता के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। इस अभियान के तहत राज्य की नदियों, तालाबों, कुओं, बावड़ियों और चेकडैमों की सफाई, गहरीकरण और सौंदर्यीकरण का कार्य किया जा रहा है। प्रदेश में लगभग 2,500 करोड़ रुपये की लागत से 10 हजार से अधिक चेकडैम और स्टॉपडैम के रखरखाव सहित हजारों तालाबों के गहरीकरण की योजना पर काम जारी है। इस पूरी प्रक्रिया में स्थानीय ग्राम पंचायतों, नगरीय निकायों, महिलाओं और युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

चूंकि मध्यप्रदेश एक कृषि प्रधान राज्य है, इसलिए यहां की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पूरी तरह जल की उपलब्धता पर टिकी है। जनसंख्या वृद्धि, अनियमित मानसून और गिरते भूजल स्तर की चुनौतियों से निपटने में यह अभियान अत्यंत सहायक सिद्ध हो रहा है। ‘रिज-टू-वैली’ मॉडल और खेत तालाबों के निर्माण से किसानों की सिंचाई सुविधाएं बेहतर हुई हैं, जिससे उनकी आय में वृद्धि दर्ज की जा रही है। इसके साथ ही, ‘पानी चौपाल’ जैसे आयोजनों के माध्यम से किसानों को कम पानी वाली फसलों और आधुनिक सिंचाई तकनीकों के प्रति जागरूक किया जा रहा है।

यह अभियान न केवल राज्य के जल संकट को दूर कर रहा है, बल्कि ऐतिहासिक एवं पारंपरिक जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार कर सांस्कृतिक धरोहर और पर्यटन को भी समृद्ध बना रहा है। अमृत सरोवरों के जल क्षेत्र में हुई वृद्धि और नदियों के पुनर्जीवन के चलते मध्यप्रदेश जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हो गया है। जल संपन्न भविष्य के निर्माण के लिए यह सरकारी उपक्रम के बजाय समाज के सामूहिक संकल्प का रूप ले चुका है।

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