मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन में मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड ने नए वक्फ अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन के जरिए संपत्तियों के संरक्षण, पारदर्शी प्रबंधन और लोकहित में उनके उपयोग को लेकर कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। बोर्ड ने वर्षों से वक्फ जमीनों पर जमे अवैध कब्जाधारियों को हटाने के साथ ही भौतिक सत्यापन के बाद जरूरतमंदों को रोजगार से जोड़ने की पहल की है। इसके अतिरिक्त, राजस्व वृद्धि के लिए अन्य राज्यों की वक्फ समितियों के साथ विचार-विमर्श कर कार्ययोजना तैयार की गई है। केंद्र सरकार के ‘उम्मीद पोर्टल’ पर वक्फ संपत्तियों का शत-प्रतिशत लेखा-जोखा दर्ज कराने में मध्य प्रदेश ने पूरे देश में प्रथम स्थान हासिल किया है, जिसके परिणामस्वरूप बोर्ड को प्रतिष्ठित ‘स्कॉच अवार्ड’ से सम्मानित किया गया है।
नए वक्फ अधिनियम के लागू होने से मुस्लिम समुदाय के युवाओं के लिए शिक्षा और प्रगति की नई राहें खुली हैं। मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल के अनुसार, मुख्यमंत्री डॉ. यादव के नेतृत्व में कानून की मूल भावना के अनुरूप कई सामाजिक बदलाव किए गए हैं। इसी कड़ी में प्रशासनिक और आर्थिक सहयोग प्रदान कर 1,552 छात्र-छात्राओं को पढ़ाई बीच में छोड़ने (ड्रॉप आउट) से बचाया गया। इस दिशा में एक और बड़ा कदम उठाते हुए मुख्यमंत्री डॉ. यादव 25 मई को भोपाल के रवीन्द्र भवन में जिले के 849 मेधावी विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति प्रदान कर सम्मानित करेंगे। वक्फ बोर्ड की योजना इस सिलसिले को आगे बढ़ाते हुए राज्य के प्रत्येक जिले में मेधावी छात्रों को पुरस्कृत करने की है। बोर्ड के ‘पढ़ो पढ़ाओ – राष्ट्र निर्माण में भागीदार बनो’ जैसे नवाचार की सफलता को देखते हुए कई अन्य राज्यों के अधिकारी भी इस कार्यशैली को समझने मध्य प्रदेश आ रहे हैं।
मुख्यमंत्री के दिशा-निर्देशों के चलते बोर्ड को कानूनी और प्रशासनिक तौर पर अभूतपूर्व मजबूती मिली है, जिसके तहत वक्फ माफियाओं और दागी प्रबंधकों के खिलाफ एक कड़ा अभियान छेड़ा गया है। संपत्तियों को अवैध कब्जों से मुक्त कराकर एक जवाबदेह प्रबंधन को सौंपने के ठोस कदम उठाए गए हैं। इस दौरान समानांतर व्यवस्था चलाकर वक्फ को नुकसान पहुँचाने वाले तत्वों के विरुद्ध सख्त विधिक कार्रवाई की गई। संपत्तियों को वित्तीय क्षति पहुँचाने वाले प्रबंधकों के खिलाफ कुल 41 करोड़ रुपये से अधिक की वसूली के लिए आरआरसी (राजस्व वसूली प्रमाणपत्र) और नोटिस जारी किए गए हैं।
इस कार्रवाई के अंतर्गत भोपाल के वक्फ यतीमखाना शाहजहाँनी के प्रबंधक को 28 करोड़ 96 लाख रुपये का वसूली नोटिस दिया गया है, जिसे देश के वक्फ इतिहास की सबसे बड़ी वित्तीय वसूली कार्रवाई माना जा रहा है। इसी प्रकार, उज्जैन के वक्फ मदर गेट प्रबंधन के खिलाफ 7 करोड़ 21 लाख रुपये, सागर की वक्फ जामा मस्जिद (बीना बजरिया) के प्रबंधकों के खिलाफ 1 करोड़ 84 लाख रुपये तथा इंदौर के वक्फ बड़वाली चौकी प्रकरण में 1 करोड़ 24 लाख रुपये की वसूली की कार्रवाई की जा रही है। इसके अलावा, भोपाल के वक्फ हिंदू अनाथालय प्रबंधन पर 1 करोड़ 5 लाख रुपये की आरआरसी जारी हुई है, जबकि जबलपुर के वक्फ अंजुमन इस्लामिया के पूर्व अध्यक्ष प्यारे साहब से वक्फ को पहुँचाई गई 81 लाख 43 हजार रुपये की क्षति की वसूली के लिए नोटिस जारी किया गया है।
केंद्र सरकार के नए संशोधन कानून के कारण अब राज्य की सभी वक्फ संपत्तियों को ऑनलाइन दर्ज कर दिया गया है। इस पूर्ण डिजिटलीकरण से व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता आई है और हेरफेर की गुंजाइश खत्म होने से वक्फ माफियाओं में हड़कंप है। अनैतिक गतिविधियों पर लगाम कसने के साथ ही वक्फ की कृषि भूमियों की समय पर पारदर्शी नीलामी की गई, जिससे बोर्ड के राजस्व में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इस प्रशासनिक सुधार की समाज के सभी वर्गों द्वारा सराहना की जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मध्य प्रदेश वक्फ बोर्ड के इतिहास में पहली बार बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण का निर्णय लिया गया है। बोर्ड अध्यक्ष डॉ. सनवर पटेल ने बताया कि प्रदेश भर में वक्फ बोर्ड की भूमियों पर 5 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य तय किया गया है। इसके तहत समाज के प्रत्येक व्यक्ति से अपने पूर्वजों की स्मृति में एक पौधा लगाने का आग्रह किया गया है। इन पौधों की समुचित देखरेख के लिए जिला स्तर पर जवाबदेही तय की जाएगी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों को बोर्ड द्वारा पुरस्कृत भी किया जाएगा।