मध्यप्रदेश वन विभाग की बड़ी कामयाबी: भारी बाधाओं के बीच जंगली हाथी ‘ई-5’ का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा

मध्यप्रदेश वन विभाग की बड़ी कामयाबी: भारी बाधाओं के बीच जंगली हाथी ‘ई-5’ का रेस्क्यू ऑपरेशन पूरा

मध्यप्रदेश के वन विभाग ने दक्षिण शहडोल और अनूपपुर के वन क्षेत्रों में लगातार दहशत का कारण बने जंगली नर हाथी ‘ई-5’ को एक जटिल रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सुरक्षित पकड़ लिया है। मुख्य वन्यप्राणी अभिरक्षक डॉ. समिता राजौरा एवं अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) श्री एल. कृष्णमूर्ति की देखरेख में इस रेस्क्यू और ट्रांसलोकेशन अभियान को दक्षिण शहडोल के केशवाही रेंज में संपन्न किया गया। इस हाथी द्वारा क्षेत्र में मकानों को तोड़े जाने, मवेशियों को हानि पहुंचाने और जनहानि करने के मामले सामने आने के बाद सरकार ने यह कदम उठाया।

हाथी को सुरक्षित पकड़ने के लिए एक व्यापक रणनीतिक ढांचा तैयार किया गया था। इस अभियान का फील्ड कमांडर के रूप में नेतृत्व बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर डॉ. अनुपम सहाय और मुख्य वन संरक्षक शहडोल श्री महेंद्र प्रताप सिंह ने संयुक्त रूप से किया। इस पूरे ऑपरेशन में चार अलग-अलग वन मंडलों—बांधवगढ़, दक्षिण शहडोल, उत्तर शहडोल और अनूपपुर की टीमों ने मिलकर काम किया, जिससे अंतर-विभागीय समन्वय की एक मिसाल कायम हुई।

सक्रिय रूप से हाथी को पकड़ने से पहले वन विभाग ने तकनीकी और सामाजिक स्तर पर तैयारियां की थीं। ड्रोन कैमरों से निगरानी और रीयल-टाइम ट्रैकिंग के जरिए हाथी की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही थी। ग्रामीण क्षेत्रों में किसी भी अनहोनी से बचने के लिए सार्वजनिक उद्घोषणा प्रणाली से लगातार अलर्ट जारी किए गए। इसके अलावा बांधवगढ़ से आए प्रशिक्षित कुमकी हाथियों और उनके महावतों को तैनात किया गया था, जिन्होंने ‘ई-5’ की आक्रामकता को शांत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विशेषज्ञ डॉक्टरों और महावतों की टीम ने 20 मई को क्षेत्र का मुआयना करने के बाद जब ‘ई-5’ से पहला संपर्क किया, तो उसने कुमकी हाथी ‘रामा’ के साथ कोई हिंसक व्यवहार नहीं किया। इससे डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि हाथी अपने दल से बिछड़ जाने के कारण अकेलेपन और तनाव के दौर से गुजर रहा था। इसके बाद रेस्क्यू टीम ने आगे की कार्रवाई को अमलीजामा पहनाया।

अभियान के दौरान वन विभाग को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। 22 मई को तड़के जब ट्रैंक्विलाइजर गन की मदद से हाथी को नियंत्रित करने का प्रयास किया गया, तो उसने हिंसक विरोध किया, जिससे ट्रांसपोर्ट पिंजरा और जीपीएस कॉलर क्षतिग्रस्त हो गए। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने तत्काल ऑपरेशन रोक दिया और रातभर में उपकरणों को ठीक कर नई योजना बनाई। इसके बाद 23 मई को क्रेन, जेसीबी और मेडिकल टीम के बेहतरीन तालमेल से हाथी को रेडियो कॉलर लगाकर सफलतापूर्वक ट्रांसपोर्ट वाहन में लोड किया गया और पुनर्वास के लिए बांधवगढ़ भेज दिया गया।

इस पूरे घटनाक्रम पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुए वन विभाग ने बताया कि प्रदेश में मानव और वन्यजीवों के शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए ठोस कदम उठाए जा रहे हैं। राज्य सरकार ने हाथियों के संरक्षण के लिए हाथी टास्क फोर्स का गठन करने के साथ-साथ ‘हाथी मित्र’ दल और आधुनिक ई-आई सर्विलेंस प्रणालियों को लागू किया है। इसके अलावा, प्रभावित ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और संकट के समय आर्थिक संबल देने के लिए हाथी के हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि को बढ़ाकर अब 25 लाख रुपये कर दिया गया है।

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