मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले में पुलिस की मुस्तैदी और मानवीय चेहरे का एक सराहनीय उदाहरण सामने आया है, जहां कोतवाली थाना क्षेत्र में रास्ता भूल गई एक सात वर्षीय मासूम बच्ची को डायल-112 की टीम ने तत्परता दिखाते हुए सुरक्षित उसके माता-पिता तक पहुंचा दिया। 24 मई को समय रहते मिली इस पुलिस सहायता के कारण बच्ची बिना किसी नुकसान के अपने घर लौट सकी।
यह पूरा घटनाक्रम 24 मई का है, जब भोपाल स्थित राज्य स्तरीय पुलिस कंट्रोल रूम डायल-112 को एक राहगीर के जरिए सूचना मिली कि कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले आरोन रोड स्थित चिंताहरण मंदिर के समीप एक छोटी बच्ची काफी देर से अकेली खड़ी है। सूचना में बताया गया कि बच्ची अपने घर का रास्ता भूल चुकी है और उसे तुरंत मदद की जरूरत है। इस जानकारी पर त्वरित संज्ञान लेते हुए कंट्रोल रूम ने कोतवाली इलाके में गश्त कर रहे डायल-112 वाहन को तुरंत घटना स्थल के लिए रवाना किया।
मौके पर पहुंचे डायल-112 के स्टाफ, जिनमें आरक्षक रामभरोसे भार्गव और पायलट धर्मेंद्र शर्मा शामिल थे, ने सबसे पहले बच्ची को सुरक्षात्मक रूप से अपनी देखरेख में लिया। बच्ची घबराई हुई थी, इसलिए पुलिसकर्मियों ने बेहद संवेदनशीलता और प्यार से बातचीत कर उसे सहज किया। जब बच्ची का डर दूर हुआ, तो उसने पूछताछ में अपने पिता का नाम और अपने गांव का पता पुलिस टीम को बताया।
मासूम से मिली इस जानकारी को आधार बनाकर डायल-112 के जवानों ने बिना वक्त गंवाए संबंधित गांव में संपर्क साधा और बच्ची के माता-पिता की खोजबीन शुरू की। परिजनों का पता चलते ही उन्हें तुरंत कोतवाली थाने आने के लिए कहा गया। थाने में पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी में जरूरी पहचान और दस्तावेजी सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करने के बाद बच्ची को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया गया। अपनी लापता बेटी को सही-सलामत वापस पाकर भावुक परिजनों ने डायल-112 की सेवा और दोनों पुलिसकर्मियों का दिल से धन्यवाद किया।
यह वाकया पुलिस की ‘डायल-112 हीरोज’ श्रृंखला की उस प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जो यह साबित करती है कि यह आपातकालीन सेवा महज एक सरकारी हेल्पलाइन नहीं है। यह सेवा संकट के समय बच्चों और आम नागरिकों की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पूरी संवेदनशीलता के साथ समाज के हर वर्ग की मदद के लिए सदैव तत्पर रहती है।