महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए भारत और अमेरिका में ऐतिहासिक करार, चीन के एकाधिकार को चुनौती

महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति के लिए भारत और अमेरिका में ऐतिहासिक करार, चीन के एकाधिकार को चुनौती

भारत और अमेरिका ने मंगलवार को सेमीकंडक्टर, रक्षा उपकरणों और हरित ऊर्जा क्षेत्रों के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) तथा दुर्लभ मृदा तत्वों (रेयर अर्थ्स) की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक रणनीतिक द्विपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इस समझौते का मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर एक सुरक्षित और विश्वसनीय सप्लाई चेन का निर्माण करना है। नई दिल्ली और वॉशिंगटन के बीच यह रणनीतिक कदम क्वाड संगठन के विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान उठाया गया, जिसमें भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हिस्सा लिया।

यह साझेदारी वैश्विक परिदृश्य में उस समय बेहद अहम मानी जा रही है, जब क्रिटिकल मिनरल्स और रेयर अर्थ्स के बाजार पर चीन के बढ़ते वर्चस्व को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंताएं गहरी हो रही हैं। वैश्विक संसाधनों पर बीजिंग के कड़े नियंत्रण के कारण दुनिया भर की सप्लाई चेन प्रभावित होने का जोखिम लगातार बना रहता है। इसी पृष्ठभूमि में दोनों लोकतांत्रिक देशों ने आपसी सहयोग को बढ़ाने का निर्णय लिया है, ताकि किसी भी एक देश पर निर्भरता को कम किया जा सके।

समझौते के महत्व पर प्रकाश डालते हुए भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा कि यह नया फ्रेमवर्क दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा और प्रभावी कदम साबित होगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस विषय पर क्वाड देशों के मंच पर भी विस्तार से बातचीत हुई है। विदेश मंत्री के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में समान विचारधारा रखने वाले राष्ट्रों के बीच इस तरह का समन्वय बेहद अनिवार्य हो चुका है। इस समझौते के तहत खनन कार्य से लेकर प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग और इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाने जैसे तमाम पहलुओं पर मिलकर काम किया जाएगा।

वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस बात पर जोर दिया कि भारत और अमेरिका के साझा रणनीतिक हितों ने ही इस समझौते को धरातल पर उतारने का काम किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि आधुनिक और नवाचार पर आधारित कोई भी अर्थव्यवस्था केवल एक ही स्रोत या देश पर निर्भर रहकर सुरक्षित नहीं रह सकती, क्योंकि ऐसी निर्भरता का इस्तेमाल भविष्य में दबाव बनाने के राजनीतिक हथियार के रूप में किया जा सकता है। रुबियो ने अपनी हालिया भारत यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के लिए लगातार प्रयास हो रहे हैं और यह समझौता उसी का एक प्रत्यक्ष परिणाम है।

इस रणनीतिक समझौते की पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए अमेरिकी विदेश मंत्री ने बताया कि इसकी शुरुआती रूपरेखा इसी वर्ष 4 फरवरी को तैयार हो गई थी। उस समय भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने वॉशिंगटन डीसी में आयोजित ‘क्रिटिकल मिनरल्स फोरम’ में हिस्सा लिया था। इसके साथ ही उन्होंने भारत द्वारा ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ पर हस्ताक्षर किए जाने की सराहना भी की। यह अमेरिका के नेतृत्व में काम करने वाला एक विशेष वैश्विक समूह है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद वैश्विक नेटवर्क विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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