देश के विभिन्न राज्यों में जारी भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते पारे के बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नागरिकों से अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया है। उन्होंने जनता से खुद को हाइड्रेटेड रखने के साथ-साथ समाज के कमजोर वर्गों, बुजुर्गों, बच्चों और बेजुबान पशु-पक्षियों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने की अपील की। प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि संकट के इस दौर में आपसी सहयोग और मानवीय करुणा बेहद महत्वपूर्ण हैं।
मौसम के इस कड़े रुख को देखते हुए प्रधानमंत्री ने स्वास्थ्य संबंधी लक्षणों को गंभीरता से लेने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि चक्कर आना, जी मिचलाना और भारी थकावट जैसे संकेतों को कतई नजरअंदाज न करें। यदि कोई व्यक्ति कमजोरी या सिरदर्द से परेशान दिखे, तो उसे तुरंत छांव वाली ठंडी जगह पर पहुंचाएं और पानी या ओआरएस (ORS) का घोल दें। उन्होंने सचेत किया कि लापरवाही बरतने पर यह स्थिति हीटस्ट्रोक (लू लगना) जैसी गंभीर आपात स्थिति में बदल सकती है, इसलिए समय पर की गई मदद जीवन रक्षक साबित हो सकती है।
विशेष रूप से संवेदनशील वर्गों का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बच्चे, बुजुर्ग और खुले आसमान के नीचे काम करने वाले मजदूर इस मौसम में सबसे ज्यादा जोखिम में होते हैं। उन्होंने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपने परिवार के बुजुर्गों, माता-पिता और रिश्तेदारों से लगातार संपर्क में रहें। उन्हें दोपहर के समय बाहर न निकलने, पर्याप्त आराम करने और नियमित अंतराल पर पानी पीते रहने के लिए प्रेरित करें।
मानवीय संवेदनाओं को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने बेजुबान जीव-जंतुओं की प्यास बुझाने पर भी जोर दिया। उन्होंने जनता से अपील की कि वे अपनी छतों, बालकनी, घरों या दफ्तरों के बाहर पानी से भरे बर्तन जरूर रखें, क्योंकि आपका यह छोटा सा प्रयास किसी पक्षी या जानवर की जान बचा सकता है। इसके साथ ही उन्होंने उन नागरिकों की सराहना की जो राहगीरों के लिए सड़कों और दुकानों के बाहर ठंडे पानी के मटके रखवा रहे हैं।
इस संबंध में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी प्रधानमंत्री ने विस्तृत सुझाव साझा किए। उन्होंने लिखा कि देश के कई हिस्सों में बढ़ता तापमान दैनिक जीवन के लिए बड़ी चुनौती बन रहा है। ऐसी स्थिति में हर नागरिक को सतर्क रहना चाहिए, जरूरत के मुताबिक पानी साथ लेकर निकलना चाहिए और अपनों का हालचाल लेते रहना चाहिए। उन्होंने आह्वान किया कि इस कठिन मौसम में करुणा और सेवा भाव ही हमारा मार्गदर्शक होना चाहिए।