असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित: देश में समानता स्थापित करने के लिए सरकार संकल्पबद्ध, गृह मंत्री अमित शाह ने दी बधाई

असम विधानसभा में समान नागरिक संहिता विधेयक पारित: देश में समानता स्थापित करने के लिए सरकार संकल्पबद्ध, गृह मंत्री अमित शाह ने दी बधाई

असम विधानसभा ने बुधवार को एक बड़ा कदम उठाते हुए समान नागरिक संहिता (यूसीसी) विधेयक-2026 को मंजूरी दे दी है। इस ऐतिहासिक विधायी प्रक्रिया के पूरे होने पर केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राज्य के नागरिकों और वहां की सरकार को अपनी शुभकामनाएं भेजी हैं। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि देश के प्रत्येक नागरिक के लिए एक समान कानून की व्यवस्था करना भारतीय जनता पार्टी के बुनियादी सिद्धांतों में शामिल रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारें इस दिशा में लगातार काम कर रही हैं।

मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में राज्य सरकार ने विपक्ष के तीखे विरोध और हंगामे के बीच इस विधेयक को सदन से पारित कराया। विपक्षी दलों द्वारा इस बिल को प्रवर समिति (सेलेक्ट कमेटी) के पास भेजने की मांग की जा रही थी, जिसे दरकिनार कर दिया गया। इस नए कानून के लागू होने के साथ ही असम अब उत्तराखंड और गुजरात के बाद यूसीसी अपनाने वाला देश का तीसरा राज्य बन गया है, जबकि पूर्वोत्तर भारत में ऐसा करने वाला यह पहला राज्य है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ के जरिए असम के लोगों को इस उपलब्धि पर बधाई दी। उन्होंने अपनी पोस्ट में लिखा कि समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन भाजपा की स्थापना के समय से ही उसके मुख्य एजेंडे में शामिल रहा है। उन्होंने आगे कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पूरे देश में कानून के समक्ष समानता के संवैधानिक सिद्धांत को लागू करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। गृह मंत्री ने मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के साथ-साथ विधेयक के पक्ष में मतदान करने वाले सभी विधायकों की भी सराहना की।

असम सरकार के इस कदम की सराहना करते हुए उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि असम विधानसभा द्वारा इस विधेयक को पारित किया जाना एक उन्नत, समरस और मजबूत भारत के निर्माण की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा। सीएम धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में उत्तराखंड से शुरू हुई यूसीसी की यह लहर अब देश के अन्य हिस्सों में भी फैल रही है। यह पहल बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के न्याय और समानता पर आधारित भारत के दृष्टिकोण को पूरा करने में मददगार होगी।

इस नए कानून के दायरे में विवाह, तलाक, आपसी अलगाव, संपत्ति के उत्तराधिकार, संपदा के विभाजन और लिव-इन संबंधों जैसे महत्वपूर्ण विषय शामिल होंगे, जिन पर अब सभी नागरिकों के लिए एक समान कानूनी नियम लागू होंगे। इस कानून के तहत बहुविवाह प्रथा पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है। इसके अतिरिक्त, जो लोग लिव-इन रिलेशनशिप में रह रहे हैं, उनके लिए अब सरकारी तौर पर पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना कानूनी रूप से अनिवार्य कर दिया गया है।

यह कदम असम में राजनीतिक वादों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। साल 2026 के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले भाजपा ने अपने घोषणापत्र में यूसीसी को लागू करने का प्रमुख संकल्प लिया था। इसी महीने आयोजित हुई राज्य कैबिनेट की पहली बैठक में इस मसौदे को हरी झंडी दी गई थी। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने इस कानून को राज्य के इतिहास का एक बड़ा मोड़ बताते हुए सभी विधानसभा सदस्यों का धन्यवाद किया है। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रिया की जानकारी देते हुए बताया कि इस विधेयक को अब पहले असम के राज्यपाल के पास और तत्पश्चात अंतिम स्वीकृति के लिए राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।

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