भारत ने वैश्विक मंच पर एक बार फिर आतंकवाद के विरुद्ध अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ (शून्य सहनशीलता) की प्रतिबद्धता को मजबूती से दोहराया है। नई दिल्ली में शुक्रवार को आयोजित साप्ताहिक प्रेस वार्ता के दौरान विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले और आतंकी गतिविधियों को वित्तीय या कूटनीतिक मदद मुहैया कराने वाले राष्ट्रों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समुदाय को एकजुट होकर कड़े कदम उठाने चाहिए। मंत्रालय के प्रवक्ता ने देश की सुरक्षा प्राथमिकताओं को रेखांकित करते हुए स्पष्ट किया कि इस वैश्विक खतरे से निपटने के लिए अब सामूहिक और निर्णायक कार्रवाई का समय आ गया है।
साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सीमा पार से संचालित होने वाला आतंकवाद वर्तमान में संपूर्ण विश्व के लिए एक अत्यंत गंभीर चुनौती बन चुका है। उन्होंने विश्व समुदाय से आह्वान किया कि इस समस्या के समूल विनाश के लिए सभी देशों को आपसी मतभेद भुलाकर एक मंच पर आना होगा। प्रवक्ता ने आगे जोड़ते हुए कहा कि जो देश आतंकवाद को पाल-पोस रहे हैं या अपनी धरती का उपयोग आतंकी नेटवर्क के संचालन के लिए होने दे रहे हैं, उनकी पहचान उजागर कर उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जवाबदेह ठहराया जाना बेहद जरूरी है।
यह आधिकारिक बयान राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल द्वारा हाल ही में मॉस्को में दिए गए संदेश के अनुरूप है। मॉस्को में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए एनएसए डोभाल ने दोहरे मापदंडों पर कड़ा प्रहार किया था। उन्होंने दो-टूक शब्दों में कहा था कि आतंकवाद से निपटने के मामले में किसी भी प्रकार का दोहरा रवैया या पक्षपात कतई स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने वैश्विक शक्तियों को सचेत किया कि अब जिम्मेदार देशों को यह तय करना ही होगा कि वे आतंकवाद के संरक्षकों के साथ हैं या उनके समूल नाश के पक्ष में हैं।
मॉस्को में आयोजित इस उच्च स्तरीय सुरक्षा मंच में दुनिया भर के नीति निर्माताओं, सुरक्षा विशेषज्ञों और विभिन्न देशों के प्रतिनिधियों ने शिरकत की। इस सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य समकालीन वैश्विक सुरक्षा चुनौतियों, आतंकवाद के बढ़ते दायरे और एक बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था में विभिन्न देशों के बीच रणनीतिक समन्वय को बढ़ाना था। इस बैठक में आतंकवाद के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए साझा खुफिया इनपुट और तकनीकी सहयोग पर भी विस्तार से चर्चा हुई।
सुरक्षा चिंताओं का दायरा बढ़ाते हुए राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने पश्चिम एशिया के मौजूदा हालात पर विशेष रूप से चिंता व्यक्त की। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए लाल सागर और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रैट ऑफ होर्मुज) जैसे संवेदनशील समुद्री क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता करने की आवश्यकता प्रतिपादित की। डोभाल के अनुसार, वैश्विक वाणिज्य और निर्बाध व्यापारिक आवाजाही को सुनिश्चित करने के लिए इन समुद्री रास्तों को हर तरह के खतरों से सुरक्षित रखना अनिवार्य है।
इसके साथ ही, भारतीय पक्ष ने वैश्विक स्तर पर निर्णय लेने वाली संस्थाओं के ढांचे में बड़े बदलाव की वकालत की। सम्मेलन में कहा गया कि वर्ष 1945 के उत्तरार्ध में स्थापित की गई अंतरराष्ट्रीय संस्थागत प्रणालियों में अब व्यापक सुधार का समय आ चुका है। भारत ने जोर देकर कहा कि समकालीन सुरक्षा संकटों और वैश्विक चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए विकासशील और अल्पविकसित देशों (ग्लोबल साउथ) की आवाज को इन संगठनों में अधिक प्रतिनिधित्व और महत्व दिया जाना चाहिए।