इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण विमान किरायों में बढ़ोतरी की तैयारी

इंडिगो को चौथी तिमाही में ₹2,536 करोड़ का घाटा, ईंधन की बढ़ती कीमतों के कारण विमान किरायों में बढ़ोतरी की तैयारी

देश की अग्रणी विमानन कंपनी इंटरग्लोब एविएशन (इंडिगो) ने 29 मई 2026 को वित्त वर्ष 2026 की अपनी चौथी तिमाही के वित्तीय परिणाम जारी कर दिए हैं। इस तिमाही में कंपनी को ₹2,536 करोड़ का समेकित शुद्ध घाटा (कॉन्सोलिडेटेड नेट लॉस) हुआ है, जबकि बीते वर्ष की समान अवधि में कंपनी ने ₹3,068 करोड़ का मुनाफा दर्ज किया था। वर्तमान में घरेलू क्षमता पर पाबंदियों, रुपये में गिरावट और विमान ईंधन की उच्च दरों के कारण एयरलाइन को इस विपरीत परिस्थिति का सामना करना पड़ रहा है।

बाजार में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाली इस एयरलाइन पर इस तिमाही में ₹250 करोड़ का एकमुश्त शुल्क (वन-टाइम चार्ज) भी भार बना। हालांकि, सालाना आधार पर नुकसान के बावजूद कंपनी के परिचालन राजस्व (ऑपरेशनल रेवेन्यू) में आंशिक सुधार देखा गया है। चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में इंडिगो का राजस्व मामूली बढ़त के साथ ₹22,438 करोड़ दर्ज किया गया, जो इससे पिछले वित्त वर्ष की चौथी तिमाही में ₹22,152 करोड़ था।

ईंधन के बढ़ते आर्थिक बोझ को कम करने के लिए एयरलाइन ने अब इसका भार यात्रियों पर डालने का निर्णय लिया है। इंडिगो के अनुसार, घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों ही मार्गों पर हवाई किरायों में वृद्धि की जाएगी। मध्य पूर्व में जारी संकट के चलते वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें अस्थिर बनी हुई हैं, जिसके कारण एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) की लागत बढ़ गई है।

इस अनिश्चितता से निपटने के लिए कंपनी अब ‘फ्यूल हेजिंग’ की रणनीति पर विचार कर रही है। एयरलाइन के एक शीर्ष अधिकारी ने बताया कि जोखिम प्रबंधन के तहत इस उपाय को अपनाने की योजना बनाई जा रही है, जिसका उपयोग दुनिया की कई अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस अपने मार्जिन को सुरक्षित रखने के लिए करती हैं। प्रबंधन का मानना है कि विमानन क्षेत्र में ईंधन की कीमतें सबसे बड़ा परिवर्तनशील कारक हैं, इसलिए बाजार के अनुसार किरायों में बदलाव जारी रहेगा।

इसके अतिरिक्त, इंडिगो के बोर्ड ने विमानन संपत्तियों के अधिग्रहण को मजबूत करने के लिए 450 मिलियन डॉलर तक के फाइनेंस लीज ऑब्लिगेशंस के आंशिक प्रीपेमेंट को हरी झंडी दे दी है। यह भुगतान किश्तों में कंपनी की पूर्ण स्वामित्व वाली अनुषंगी इकाई ‘इंटरग्लोब एविएशन फाइनेंशियल सर्विसेज IFSC प्राइवेट लिमिटेड’ को किया जाएगा, जिससे विमान, इंजन और अन्य कलपुर्जों की खरीद की जा सकेगी।

कंपनी के प्रबंध निदेशक राहुल भाटिया ने वित्तीय प्रदर्शन पर कहा कि वित्त वर्ष 2026 व्यावसायिक दृष्टिकोण से अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा, जिससे मुनाफे पर असर पड़ा। फिर भी, विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव और एकमुश्त शुल्कों को अलग कर दिया जाए, तो इंडिगो ने ₹7,500 करोड़ का लाभ अर्जित किया है। इस दौरान कंपनी की क्षमता में 9.5% और कुल आय में 6% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।

शेयर बाजार और परिचालन आंकड़ों के अनुसार, इस तिमाही में यात्रियों की संख्या 1.1% गिरकर 31.6 मिलियन रह गई और प्रति किलोमीटर कमाई (यील्ड) भी 2.2% घटकर ₹5.20 पर आ गई। पैसेंजर लोड फैक्टर में भी 1.7% की गिरावट देखी गई। वहीं, नतीजों से पूर्व इंटरग्लोब एविएशन का शेयर आज 3.28% की गिरावट के साथ ₹4,420 पर बंद हुआ। बीते छह महीनों में इसमें 24% की गिरावट आई है, जबकि कंपनी का कुल मार्केट कैप 1.71 लाख करोड़ रुपये है।

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