मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को मंत्रालय परिसर में मध्य प्रदेश मंत्रि-परिषद की एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई। इस बैठक में प्रदेश की सामाजिक और आर्थिक उन्नति को ध्यान में रखते हुए लगभग 13 हजार 800 करोड़ रुपये की विभिन्न विकास योजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति दी गई। सरकार के इन फैसलों का मुख्य फोकस ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संबल देना, शहरी परिवहन का आधुनिकीकरण करना और शासन व्यवस्था में उन्नत सूचना प्रौद्योगिकी का समावेश करना है।
शहरी विकास के मोर्चे पर सबसे बड़ी राहत भोपाल मेट्रो परियोजना को मिली है। परिवहन नेटवर्क के आधुनिकीकरण के लिए कैबिनेट ने कुल पुनरीक्षित राशि 13,565.84 करोड़ रुपये को मंजूरी प्रदान की है। परियोजना के सुचारू संचालन के लिए मूल स्वीकृत बजट 6,941.40 करोड़ रुपये में 3,092.22 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि जोड़ते हुए इसे अब 10,033.62 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, औद्योगिक मानकों के तहत वित्तीय गैप को भरने के लिए 3,532 करोड़ 22 लाख रुपये के पृथक वित्तीय पोषण की व्यवस्था की गई है। इसमें केंद्र और राज्य की हिस्सेदारी के तौर पर 995 करोड़ 9 लाख रुपये की अतिरिक्त इक्विटी के साथ-साथ राज्य और केंद्रीय करों के भुगतान, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास कार्यों के लिए विभिन्न ऋण और अनुदान शामिल हैं।
तकनीकी क्षेत्र में राज्य को अग्रणी बनाने के लिए 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक की अवधि के लिए आईटी इन्फ्रास्ट्रक्चर हेतु 235 करोड़ 63 लाख रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इस योजना के तहत दो मुख्य भागों में काम होगा। पहले भाग में 180 करोड़ 20 लाख रुपये से तैयार होने वाला राज्य स्तरीय आईटी संवर्ग विभिन्न सरकारी विभागों को साइबर सुरक्षा, ब्लॉकचेन, बिग डेटा और एआई जैसे मामलों में तकनीकी परामर्श प्रदान करेगा। दूसरे भाग में 55 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से अधिकारियों को ई-गवर्नेंस और डेटा मैनेजमेंट का प्रशिक्षण दिया जाएगा, जिससे प्रशासनिक कार्यकुशलता में सुधार होगा और एमपीएसईडीसी जैसी नोडल संस्थाओं के माध्यम से आईटी परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा।
व्यापारिक और कृषि गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कपास पर मंडी शुल्क की वर्तमान दर को 1 प्रतिशत से घटाकर आधा प्रतिशत (0.5%) कर दिया गया है। इस निर्णय से प्रदेश की 158 जिनिंग मिलों की प्रतिस्पर्धी क्षमता बढ़ेगी और करों का संग्रहण सुधरेगा। दूसरी ओर, ग्रामीण विकास निधि जुटाने के लिए सामान्य मंडी शुल्क में 50 पैसे की वृद्धि कर इसे 1.50 रुपये प्रति सैकड़ा किया गया है। निराश्रित शुल्क को 20 पैसे पर यथावत रखा गया है। बढ़ी हुई फीस से प्राप्त होने वाले अनुमानित 500 करोड़ रुपये के अतिरिक्त राजस्व का बड़ा हिस्सा ग्रामीण सड़कों, कृषि अनुसंधान, गौ-संवर्धन (12 पैसे) और मुख्यमंत्री कृषक जीवन कल्याण योजना (2 पैसे) जैसी जनकल्याणकारी योजनाओं में निर्धारित फार्मूले के तहत वितरित किया जाएगा।
फसल उपार्जन की व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से कैबिनेट ने रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की खाद्यान्न साख सीमा की शर्तों के अनुरूप वित्तीय सुरक्षा उपाय किए हैं। इसके तहत एमपी स्टेट सिविल सप्लाईज कारपोरेशन (MPSCSC) और मार्कफेड को आगामी रबी और खरीफ सीजन 2026-27 में खाद्यान्न खरीद के लिए बैंकों से ऋण लेने हेतु 8,600 करोड़ रुपये की निःशुल्क शासकीय प्रत्याभूति स्वीकृत की गई है। खाद्य विभाग को आवश्यकतानुसार इस राशि को दोनों संस्थाओं के बीच पुनरावंटित करने का अधिकार होगा। इसके साथ ही, सिविल सप्लाईज कारपोरेशन के लिए अलग से 29,500 करोड़ रुपये की एक और एक वर्षीय शासकीय गारंटी स्वीकृत की गई है ताकि किसानों को समय पर भुगतान और सुचारू उपार्जन की सुविधा मिल सके।