चंद्रयान-3 की सफलता भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता का वैश्विक प्रमाण: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

चंद्रयान-3 की सफलता भारत की तकनीकी और औद्योगिक क्षमता का वैश्विक प्रमाण: फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने रविवार को नीस में आयोजित ‘भारत इनोवेट्स लॉन्च 2026’ सम्मेलन के दौरान भारत के ऐतिहासिक ‘चंद्रयान-3’ मिशन की जमकर सराहना की। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ संयुक्त रूप से इस कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने कहा कि जुलाई 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर हुई सफल लैंडिंग ने अनुसंधान, नवाचार (इनोवेशन) और औद्योगिक कार्यान्वयन के क्षेत्र में भारत के बढ़ते कौशल को पूरी दुनिया के सामने साबित कर दिया है। 14 जून से 16 जून तक चलने वाले इस तीन दिवसीय प्रतिष्ठित सम्मेलन में भारत, फ्रांस और कई अन्य देशों के शीर्ष स्टार्टअप्स, इनोवेटर्स और वेंचर कैपिटल फंड्स हिस्सा ले रहे हैं।

राष्ट्रपति मैक्रों ने अपने संबोधन में ज़ोर देकर कहा कि इस चंद्र मिशन ने वैश्विक स्तर पर भारत के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है, जिससे देश को वैश्विक नवाचार में एक अग्रणी शक्ति के रूप में पहचान मिली है। उन्होंने भारत को फ्रांस का एक स्वाभाविक सहयोगी बताते हुए देश के जनसांख्यिकीय लाभ और मजबूत टैलेंट बेस की सराहना की। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि फ्रांस के लिए भारत की तकनीकी और नवाचार क्षमता पर विश्वास करना बेहद स्वाभाविक है, क्योंकि भारत के पास एक विशाल जनसांख्यिकीय लाभांश मौजूद है।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने भारत के कुशल कार्यबल की प्रशंसा करते हुए कहा कि 1.4 अरब की विशाल जनसंख्या वाला यह देश शिक्षा, अनुसंधान, ज्ञान और प्रशिक्षण को प्राथमिकता देता है। इसी का परिणाम है कि यहां हर वर्ष यूरोप और अमेरिका की तुलना में कहीं अधिक, यानी दस लाख से भी ज्यादा कुशल इंजीनियर तैयार होते हैं। उन्होंने आगे कहा कि हर दृष्टिकोण से अनुसंधान, नवाचार और अत्याधुनिक मॉडलों को अपनाने वाला यह देश वैश्विक स्तर पर तकनीकी प्रगति का मुख्य चालक बनकर उभर रहा है।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की असाधारण प्रगति को रेखांकित करते हुए राष्ट्रपति मैक्रों ने चंद्रयान-3 का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा, “अगर मुझे यह दिखाना हो कि आप क्या करने में सक्षम हैं, तो अंतरिक्ष क्षेत्र इसका सबसे सटीक उदाहरण है।” उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बेहद कम समय और सीमित बजट में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर पहली बार लैंडिंग कर न केवल अपनी ताकत दिखाई, बल्कि औद्योगिक स्तर पर परियोजनाओं को लागू करने की अपनी अद्भुत क्षमता का भी प्रदर्शन किया।

मैक्रों ने उन धारणाओं को पूरी तरह खारिज कर दिया जिसके तहत भारत को केवल आउटसोर्स्ड सेवाओं या कॉन्ट्रैक्टर्स का केंद्र माना जाता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सिर्फ ठेकेदारों का देश नहीं है, बल्कि यह नवाचार और अत्याधुनिक तकनीक के क्षेत्र में युगांतकारी बदलाव लाने वाला राष्ट्र है। उनके अनुसार, इस मिशन की सफलता ने एक प्रौद्योगिकी लीडर के रूप में भारत की भूमिका को स्थापित किया है और वैश्विक समुदाय को भारत के वास्तविक सामर्थ्य से परिचित कराया है।

उल्लेखनीय है कि इसरो (ISRO) का चंद्रयान-3 एक ऐतिहासिक मिशन है, जिसके तहत 14 जुलाई 2023 को अंतरिक्ष यान लॉन्च किया गया था और इसने 23 अगस्त 2023 को चंद्रमा की सतह पर सफलतापूर्वक कदम रखा था। इस कामयाबी के साथ भारत चंद्रमा पर सॉफ्ट-लैंडिंग करने वाला दुनिया का चौथा और इसके अज्ञात दक्षिणी ध्रुव पर पहुंचने वाला विश्व का पहला देश बन गया। वर्तमान में जारी ‘भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष’ के तहत आयोजित यह तीन दिवसीय कार्यक्रम दोनों देशों की मजबूत होती तकनीकी साझेदारी को प्रदर्शित करता है और भारतीय इनोवेटर्स को वैश्विक निवेशकों व शैक्षणिक संस्थानों से जुड़ने का एक बेहतरीन मंच प्रदान कर रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *