केंद्र सरकार ने मंगलवार को देश से बाहर भेजे जाने वाले डीजल और विमान ईंधन (ATF) पर अप्रत्याशित लाभ कर (विंडफॉल टैक्स) में बढ़ोतरी करने का फैसला किया है, जबकि पेट्रोल पर लगने वाले कर को पहले की तरह ही बरकरार रखा गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नवीनतम अधिसूचना के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव को देखते हुए यह कदम उठाया गया है। वैश्विक स्तर पर ऊर्जा की कीमतों की समीक्षा के बाद हर पखवाड़े इस टैक्स में बदलाव किया जाता है।
मंत्रालय की ओर से जारी आधिकारिक विज्ञप्ति के मुताबिक, डीजल के निर्यात पर देय विशेष अतिरिक्त उत्पाद शुल्क (SAED) को अब 13.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर 14 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है। इसके साथ ही, हवाई जहाजों में इस्तेमाल होने वाले ईंधन यानी एटीएफ के निर्यात पर भी शुल्क में वृद्धि की गई है, जिसे 9.5 रुपये प्रति लीटर से बढ़ाकर अब 12.5 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है।
दूसरी तरफ, पेट्रोल के मोर्चे पर सरकार ने फिलहाल कोई नया वित्तीय बोझ नहीं डाला है। विदेशों में भेजे जाने वाले पेट्रोल पर निर्यात शुल्क को 1.5 रुपये प्रति लीटर पर ही स्थिर रखा गया है। इसके अतिरिक्त, इस फैसले से आम उपभोक्ताओं की जेब पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा, क्योंकि सरकार ने घरेलू बाजार में खपत होने वाले पेट्रोल और डीजल पर लगने वाले उत्पाद शुल्क में कोई फेरबदल नहीं किया है। नतीजतन, देश के भीतर ईंधन के खुदरा दाम जस के तस बने रहेंगे।
इस नीतिगत बदलाव की पृष्ठभूमि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव से जुड़ी है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इसी संकट को देखते हुए सरकार ने सबसे पहले 26 मार्च को डीजल और एटीएफ के निर्यात पर कर लगाने की शुरुआत की थी, जिसके बाद 16 मई को पेट्रोल को भी इस दायरे में लाया गया था।
इस विशेष टैक्स को लागू रखने के पीछे सरकार का मुख्य उद्देश्य घरेलू बाजार में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति को नियंत्रित रखना है। दरअसल, वैश्विक स्तर पर युद्ध की स्थिति बनने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। ऐसे में सरकार इस कदम के जरिए निर्यातकों को वैश्विक और घरेलू कीमतों के अंतर का अनुचित लाभ उठाने से रोकना चाहती है, ताकि पश्चिम एशिया संकट के इस दौर में देश के भीतर पेट्रोलियम उत्पादों की कोई कमी न हो।