भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापक साझेदारी की शुरुआत, पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता को बताया ऐतिहासिक

भारत और स्लोवाकिया के बीच व्यापक साझेदारी की शुरुआत, पीएम मोदी ने द्विपक्षीय वार्ता को बताया ऐतिहासिक

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और स्लोवाकिया के प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के बीच हाल ही में एक उच्च स्तरीय बैठक संपन्न हुई, जिसे भारतीय प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के आपसी संबंधों में एक मील का पत्थर करार दिया है। इस बैठक के दौरान दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय रिश्तों को ‘कॉम्प्रिहेंसिव पार्टनरशिप’ (व्यापक साझेदारी) के स्तर पर ले जाने का फैसला किया, जिससे आपसी सहयोग को एक नई दिशा मिलेगी।

इस बैठक के परिणामों पर संतोष व्यक्त करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इसे भारत-स्लोवाकिया मित्रता का एक ऐतिहासिक क्षण बताया। उन्होंने साझा किया कि प्रधानमंत्री रॉबर्ट फित्सो के साथ वार्ता बेहद सकारात्मक रही। दोनों देशों के बीच संबंधों की व्यापक क्षमताओं को पहचानते हुए ही इस रणनीतिक साझेदारी को उन्नत करने का निर्णय लिया गया है।

वार्ता के दौरान मुख्य रूप से आर्थिक और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया। दोनों नेताओं ने ऑटोमोबाइल, रेलवे, एडवांस मैन्युफैक्चरिंग और ग्रीन टेक्नोलॉजी जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त प्रयासों को बढ़ाने पर सहमति जताई। इसके साथ ही, पीएम मोदी ने उल्लेख किया कि भारत और यूरोपीय संघ के बीच आगामी मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) दोनों देशों के व्यापारिक संबंधों को और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

भविष्य के तकनीकी सहयोग को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) से विकास के नए मार्ग प्रशस्त होंगे। उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और अंतरिक्ष विज्ञान जैसे उभरते क्षेत्रों को इस साझेदारी का मुख्य स्तंभ बताया, जहां दोनों देश मिलकर काम करेंगे। संयुक्त प्रेस वार्ता में दोनों प्रधानमंत्रियों ने भरोसा जताया कि इस कदम से आने वाले समय में साझा समृद्धि और नागरिकों के लिए नए अवसरों का सृजन होगा।

इस राजनयिक दौरे के दौरान सुरक्षा और प्रशासनिक स्तर पर तीन बड़ी घोषणाएं की गईं, जिनमें संबंधों को व्यापक साझेदारी का दर्जा देने के अलावा, आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई के लिए एक संयुक्त कार्य समूह (ज्वाइंट वर्किंग ग्रुप) का गठन और नियमित कांसुलर संवाद की शुरुआत शामिल है। इसके अतिरिक्त, क्वांटम कम्युनिकेशन, क्रिटिकल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन और स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी समझौते किए गए, जिसके तहत भारत के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ नेचरोपैथी और स्लोवाक हेल्थ स्पा पीएस्टनी मिलकर काम करेंगे।

सांस्कृतिक जुड़ाव का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत के प्राचीन उपनिषदों का स्लोवाक भाषा में अनुवाद दोनों देशों की सांस्कृतिक निकटता को दर्शाता है। उन्होंने स्लोवाकिया में रह रहे भारतीय समुदाय के योगदान की भी सराहना की और उम्मीद जताई कि यह नई साझेदारी व्यापार, रक्षा, शिक्षा और संस्कृति सहित सभी क्षेत्रों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी।

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