मध्यप्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा को बढ़ावा, इंडो-जर्मन सहयोग परियोजना के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर

मध्यप्रदेश में एग्रो सौर ऊर्जा को बढ़ावा, इंडो-जर्मन सहयोग परियोजना के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में मध्यप्रदेश ने नवकरणीय ऊर्जा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की दिशा में एक और बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। सोमवार को भोपाल के मंत्रालय परिसर में एक विशेष कार्यक्रम के दौरान राज्य के नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा विभाग, ऊर्जा विकास निगम और जर्मन सरकार द्वारा समर्थित इंडो-जर्मन एग्री वोल्टाइक सहयोग परियोजना (आईजीसीए) के प्रतिनिधियों ने एक द्विपक्षीय समझौते पत्र का आदान-प्रदान किया। यह पहल मुख्य रूप से एग्री वोल्टाइक संगठन के सहयोग पर आधारित है, जो एक ही भूखंड पर खेती और बिजली उत्पादन के दोहरे उपयोग की वकालत करता है।

इस साझेदारी के दूरगामी परिणामों को रेखांकित करते हुए अधिकारियों ने बताया कि मई 2030 तक प्रभावी रहने वाला यह समझौता राज्य में एक विशिष्ट एग्रीवोल्टाइक इकोसिस्टम विकसित करेगा। यह मॉडल केंद्र की पीएम-कुसुम 2.0 योजना के लक्ष्यों को पूरा करने में मददगार साबित होगा। इससे खेती के लिए अलग से जमीन अधिग्रहण करने की मजबूरी खत्म होगी, जिससे देश की खाद्य सुरक्षा प्रभावित नहीं होगी और भूमि से जुड़े विवाद भी पैदा नहीं होंगे। यह कदम पर्यावरण के अनुकूल ग्रामीण विकास और ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में सहायक होगा।

किसानों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिहाज से इसे एक बड़ा अवसर माना जा रहा है, क्योंकि सरकार इस तकनीक को अपनाने के लिए सब्सिडी का लाभ देगी। योजना के अंतर्गत कृषक अपनी पैतृक भूमि के वास्तविक मालिक बने रहेंगे और उन्हें सौर संयंत्र लगाने के लिए जमीन बेचने या पट्टे पर देने की जरूरत नहीं होगी। एक ही खेत से फसल और बिजली दोनों का उत्पादन होने से ग्रामीण परिवारों को अतिरिक्त और स्थायी आमदनी की डबल सौगात मिलेगी।

तकनीकी संचालन के स्तर पर, जर्मन कंपनी राज्य सरकार को इन परियोजनाओं के आर्थिक मूल्यांकन, व्यावहारिक डिजाइनिंग, बजट प्रबंधन और जमीनी क्रियान्वयन में रणनीतिक मदद देगी। इसके सफल संचालन के लिए स्थानीय किसानों, वितरण कंपनियों (डिस्कॉम), बिजली डेवलपर्स और किसान समूहों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए ट्रेनिंग सत्र आयोजित किए जाएंगे। कंपनी का प्रयास होगा कि कृषि उत्पादकता को नुकसान पहुंचाए बिना राज्य की नियामक व्यवस्था को इस नई तकनीक के अनुकूल ढाला जाए।

इस ऐतिहासिक एमओयू के अवसर पर शासन के नीति-निर्माता और विदेशी प्रतिनिधि उपस्थित थे, जिनमें विभागीय मंत्री राकेश शुक्ला, अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव और ऊर्जा विकास निगम के एमडी अमनवीर सिंह बैंस शामिल थे। साथ ही जर्मन दूतावास के अधिकारी, संगठन के प्रतिनिधि एलेक्जेंडर और जर्मनी की जीआईजेड कंपनी के विशेषज्ञ भी इस दौरान उपस्थित रहे।

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