जी-7 शिखर सम्मेलन: फ्रांस के एवियन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की द्विपक्षीय वार्ता, व्यापार और रक्षा सहित कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

जी-7 शिखर सम्मेलन: फ्रांस के एवियन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप की द्विपक्षीय वार्ता, व्यापार और रक्षा सहित कई बड़े मुद्दों पर बनी सहमति

फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक संपन्न हुई। वर्ष 2025 में वाशिंगटन में हुई मुलाकात के बाद दोनों शीर्ष नेताओं के बीच यह पहली औपचारिक वार्ता थी। इस बैठक में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक साझेदारी को प्रगाढ़ करने पर बल दिया गया, जिसमें व्यापारिक समझौते, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा, पश्चिम एशिया के हालात और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे प्रमुख विषय शामिल रहे। राष्ट्रपति ट्रंप ने पीएम मोदी के साथ अपने प्रगाढ़ व्यक्तिगत संबंधों को रेखांकित करते हुए आपसी तालमेल को और सुदृढ़ करने का संकल्प जताया।

द्विपक्षीय वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक समझौते को लेकर बेहद सकारात्मक रुख देखने को मिला। जब अमेरिकी राष्ट्रपति से इस समझौते की प्रगति के बारे में सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देश इसके बेहद नजदीक पहुंच चुके हैं। इसके साथ ही ट्रंप ने प्रधानमंत्री मोदी की सराहना करते हुए उन्हें वैश्विक स्तर के अत्यंत कुशल और दृढ़ वार्ताकारों में से एक करार दिया।

रक्षा क्षेत्र में आपसी सहयोग को लेकर भी अमेरिका ने भारत के प्रति अपना मजबूत भरोसा प्रकट किया। राष्ट्रपति ट्रंप ने आश्वस्त किया कि किसी भी संकट या हमले की स्थिति में अमेरिका पूरी तरह भारत के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि यदि भारत पर कोई आंच आती है, तो अमेरिकी प्रशासन सहायता के लिए तत्पर रहेगा।

बैठक के दौरान पश्चिम एशिया के घटनाक्रमों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने इस क्षेत्र में अमन-चैन और स्थिरता कायम करने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। पीएम मोदी ने कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप की कोशिशों के चलते इस अशांत क्षेत्र में शांति की एक नई किरण दिखाई दे रही है। मालूम हो कि ट्रंप लगातार ईरान और क्षेत्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर नए कदम उठा रहे हैं।

इसके अलावा, वैश्विक व्यापार और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद संवेदनशील माने जाने वाले होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को निर्बाध रखने पर दोनों नेताओं ने पूर्ण सहमति जताई। प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए इस समुद्री रास्ते का खुला रहना अनिवार्य है। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के लिए काफी हद तक इस मार्ग पर निर्भर है, इसलिए इस विषय पर साझा रणनीति बेहद अहम है।

अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर भी भारत ने अपनी चिंताएं साझा कीं। प्रधानमंत्री मोदी ने इसे देश की शीर्ष प्राथमिकता बताया। हाल के दिनों में समुद्री मार्गों पर जान गंवाने वाले भारतीय नाविकों के प्रति राष्ट्रपति ट्रंप ने गहरी संवेदना और दुख प्रकट किया। वहीं, पश्चिम एशिया में भारत की भूमिका पर ट्रंप ने कहा कि पीएम मोदी के कुशल नेतृत्व में भारत प्रत्येक क्षेत्र में एक बड़ी और प्रभावी भूमिका निभा रहा है।

राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने पिछले भारत दौरे का स्मरण करते हुए भविष्य में दोबारा भारत आने के संकेत दिए। इसके साथ ही उन्होंने अमेरिका के विकास में भारतीय पेशेवरों के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें अत्यंत प्रतिभावान बताया और कहा कि रोजगार तथा प्रतिभा के मामले में दोनों देशों के संबंध हमेशा से उत्कृष्ट रहे हैं। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर देते हुए ट्रंप ने कहा कि भारत अमेरिका से ऊर्जा आयात में बढ़ोतरी कर सकता है, जिससे दोनों देशों के मजबूत संबंधों को एक नया आयाम मिलेगा।

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