सिकल सेल उन्मूलन अभियान: राष्ट्रपति ने समय से पहले राष्ट्रीय स्क्रीनिंग लक्ष्य पूरा होने पर देश को सराहा, मध्य प्रदेश के प्रयासों को दी शाबाशी

सिकल सेल उन्मूलन अभियान: राष्ट्रपति ने समय से पहले राष्ट्रीय स्क्रीनिंग लक्ष्य पूरा होने पर देश को सराहा, मध्य प्रदेश के प्रयासों को दी शाबाशी

अंतरराष्ट्रीय सिकल सेल दिवस के अवसर पर मध्य प्रदेश के खण्डवा जिले में स्थित ओंकारेश्वर में एक राज्य स्तरीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। शुक्रवार को आयोजित इस विशेष समारोह का शुभारंभ राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि के रूप में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र की इस बड़ी चुनौती से निपटने के लिए किया गया यह आयोजन एक अत्यंत सराहनीय प्रयास है। इस दौरान मंच पर राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी उपस्थित रहे, जिन्होंने राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया।

अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि वर्ष 2023 में जब इस राष्ट्रीय मिशन की शुरुआत की गई थी, तब देश के सामने कई बड़े लक्ष्य रखे गए थे। इनमें से नवजात शिशुओं से लेकर 40 वर्ष तक की आयु के 7 करोड़ नागरिकों की स्क्रीनिंग का जो लक्ष्य तय हुआ था, उसे समय सीमा से पहले ही हासिल कर लिया गया है। उन्होंने इसे वैश्विक स्तर पर आनुवंशिक बीमारियों की जांच के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल बताया और इस सफलता में मध्य प्रदेश के बहुआयामी योगदान की विशेष प्रशंसा की, जहाँ अब तक सवा करोड़ से अधिक लोगों की जांच पूरी हो चुकी है।

राष्ट्रपति ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत सरकार इस चुनौती को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ ले रही है। उन्होंने याद दिलाया कि लगभग तीन वर्ष पूर्व प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मध्य प्रदेश के शहडोल जिले से ‘राष्ट्रीय सिकल सेल एनीमिया उन्मूलन मिशन’ की शुरुआत की थी। यह केवल एक चिकित्सीय कार्यक्रम नहीं है, बल्कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय और जनजातीय कार्य मंत्रालय के संयुक्त मॉडल के रूप में तैयार एक दूरदर्शी मिशन है, जो जनजातीय स्वास्थ्य, आनुवंशिक जागरूकता और सामाजिक व्यवहार में बदलाव को एक साथ संबोधित करता है।

वैज्ञानिक अध्ययनों का हवाला देते हुए राष्ट्रपति ने बताया कि देश में करीब 2 से 2.5 करोड़ लोग इस बीमारी के वाहक हो सकते हैं, जिनमें से लाखों लोग सक्रिय रूप से इससे पीड़ित हैं। मध्य भारत के जनजातीय क्षेत्रों में इसका प्रभाव सबसे अधिक देखा गया है। उन्होंने मिशन के तीन मुख्य स्तंभों—विवाह पूर्व जेनेटिक काउंसलिंग, व्यापक स्तर पर त्वरित स्क्रीनिंग और निरंतर स्वास्थ्य देखभाल प्रबंधन—पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि डिजिटल ट्रैकिंग के माध्यम से अब तक ढाई लाख रोगियों और 20 लाख से अधिक वाहकों की पहचान की जा चुकी है, जिससे भावी पीढ़ियों को सुरक्षित किया जा सकेगा।

समारोह में राज्यपाल श्री मंगुभाई पटेल ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि सिकल सेल केवल स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह जनजातीय समाज के आर्थिक और सामाजिक विकास को भी प्रभावित करती है। राज्य में अब तक 1 करोड़ 32 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग का काम करीब 96 प्रतिशत पूरा हो चुका है। उन्होंने डिजिटल जेनेटिक कार्ड को विवाह संबंधों के लिए किसी जन्म कुंडली की तरह महत्वपूर्ण बताया, जिसका मिलान विवाह से पहले अवश्य किया जाना चाहिए।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने उद्बोधन में कहा कि आदि शंकराचार्य और जननायक टंट्या मामा की इस पावन भूमि पर आयोजित यह कार्यक्रम आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य का एक दृढ़ संकल्प है। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करते हुए मेडिकल कॉलेजों की संख्या 5 से बढ़ाकर 32 की जा रही है। साथ ही, जनजातीय नायकों के सम्मान और उनके समग्र कल्याण के लिए सरकार पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उप-मुख्यमंत्री श्री राजेंद्र शुक्ल ने भी राज्य की अग्रणी भूमिका को रेखांकित करते हुए वर्ष 2026 के अंत तक 1 करोड़ 60 लाख स्क्रीनिंग का लक्ष्य पूरा करने की बात कही। कार्यक्रम के अंत में राष्ट्रपति ने उत्कृष्ट कार्य करने वाली ग्राम पंचायतों और अधिकारियों को सम्मानित किया तथा वहाँ लगी विकास प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *