केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने नई दिल्ली में भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) के डिजिटल ऑक्शन पोर्टल ‘नेफिक्स डॉट इन’ (nafex.in) का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इस आधुनिक व्यवस्था से कृषि व्यापार में मध्यस्थों यानी बिचौलियों का दखल खत्म होगा और देश के अन्नदाताओं को उनकी उपज का सीधा आर्थिक लाभ मिल सकेगा। इस दौरान सहकारिता मंत्री ने नेफिक्स के साथ-साथ ‘दृष्टि’, ‘ईआरपी’ और ‘नाफेड कल्याण’ नाम की तीन अन्य महत्वपूर्ण पहलों का भी डिजिटल शुभारंभ किया।
कृषि क्षेत्र में सहकारिता के महत्व को रेखांकित करते हुए अमित शाह ने कहा कि साल 2014 में जो संस्था पूरी तरह बंद होने की कगार पर पहुंच चुकी थी, उसने केंद्र सरकार के सहयोग से शानदार वापसी की है। आज नाफेड लगभग 500 करोड़ रुपये के शुद्ध मुनाफे और करीब 30 हजार करोड़ रुपये के सालाना टर्नओवर के साथ देश के 74 लाख से अधिक किसानों को सीधे तौर पर संबल प्रदान कर रहा है। उन्होंने पुराने दिनों को याद करते हुए बताया कि 2014 में नाफेड अत्यंत गंभीर वित्तीय संकट से जूझ रहा था, जिसके बाद प्रबंधन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उच्च स्तरीय बैठक की और भारत सरकार से मिली आर्थिक सहायता के बाद इस संस्था को नया जीवन मिला।
सहकारिता मंत्री ने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि जब यह संस्था वित्तीय संकट में थी, तब वे पार्टी अध्यक्ष के रूप में इस स्थिति से भली-भांति वाकिफ थे। उन्होंने आगामी कार्ययोजना का जिक्र करते हुए कहा कि अगले दो वर्षों के भीतर सहकारिता मंत्रालय यह सुनिश्चित करने जा रहा है कि देश में दलहन (दालों) की खरीद में व्यापारियों या बिचौलियों की कोई भूमिका न रहे। शत-प्रतिशत दालों की खरीद सीधे किसानों के माध्यम से की जाएगी, ताकि मुनाफे की पूरी राशि उनके बैंक खातों में पहुंचे। उन्होंने भरोसा जताया कि जब किसानों को दलहन का उचित और सीधा मूल्य मिलने लगेगा, तो देश में दालों का बुआई क्षेत्र (रकबा) खुद-ब-खुद बढ़ेगा और भारत इस क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा।
अमित शाह ने आगे बताया कि किसानों से सीधे कृषि उत्पादों की खरीद के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचा (इंफ्रास्ट्रक्चर) तैयार कर लिया गया है और अब इसे ग्रामीण स्तर तक विस्तारित करने पर काम चल रहा है। उन्होंने नाफेड के अधिकारियों को प्रेरित करते हुए कहा कि वांछित परिणाम हासिल करने के लिए संस्था को पूरी दृढ़ता, पारदर्शिता और ईमानदारी के साथ काम करना होगा।
कार्यक्रम के दौरान सहकारिता मंत्री ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की पुण्यतिथि पर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी अर्पित की। उन्होंने कहा कि 23 जून का दिन देश के करोड़ों राष्ट्रवादियों के लिए अत्यंत गौरवपूर्ण और संवेदनशील है, क्योंकि इसी दिन डॉ. मुखर्जी ने ‘एक विधान, एक निशान और एक प्रधान’ के संकल्प को पूरा करने तथा भारत की अखंडता को बनाए रखने के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी। उन्होंने डॉ. मुखर्जी को दूरदर्शी राजनेता बताते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी व्यक्तिगत प्रसिद्धि के लिए काम नहीं किया, बल्कि देश की एकता और स्वतंत्रता के लिए जीवनभर संघर्ष किया, जिसके दूरगामी परिणाम आज देश के सामने हैं।