भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजित डोभाल ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 16वीं ब्रिक्स राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैठक के दौरान वैश्विक मंच पर इस समूह की प्रासंगिकता को रेखांकित किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि ब्रिक्स मात्र कुछ देशों का संगठन नहीं है, बल्कि यह विश्व की लगभग आधी आबादी का प्रतिनिधित्व करने वाला एक साझा मंच है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव, अस्थिरता और सुरक्षा खतरों के इस दौर में वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए ब्रिक्स की भूमिका बेहद अहम हो चुकी है। बैठक की अध्यक्षता करते हुए डोभाल ने सदस्य देशों के समकक्षों का स्वागत किया और आपसी सहयोग को और सुदृढ़ करने की भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया। इसके साथ ही उन्होंने संगठन की गतिविधियों में निरंतर भागीदारी और सहयोग के लिए सभी प्रतिभागी देशों का आभार व्यक्त किया।
अपने उद्घाटन संबोधन में एनएसए अजित डोभाल ने सभी प्रतिनिधियों की उपस्थिति और ब्रिक्स देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने के प्रति उनकी निरंतर प्रतिबद्धता की सराहना की। वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों का विश्लेषण करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अत्यंत जटिल और चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रही है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर सैन्य संघर्ष, भू-राजनीतिक अनिश्चितता और आर्थिक दबाव स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही, ऐसी विघटनकारी तकनीकों का उदय हो रहा है जो वैश्विक सुरक्षा के पूरे परिदृश्य को बदल रही हैं। उन्होंने चिंता व्यक्त की कि समकालीन सुरक्षा चुनौतियां लगातार गंभीर होती जा रही हैं, जबकि विवादों को सुलझाने के लिए बनी मौजूदा संस्थागत व्यवस्थाएं और तंत्र इन खतरों का सामना करने में निष्प्रभावी साबित हो रहे हैं।
बहुपक्षवाद के कमजोर होने पर चिंता प्रकट करते हुए डोभाल ने कहा कि आज जब वैश्विक स्तर पर सामूहिक प्रयासों की सबसे अधिक आवश्यकता है, तब अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में बहुपक्षीय सहयोग में गिरावट आ रही है। उन्होंने ब्रिक्स की स्थापना के मूल सिद्धांतों का स्मरण कराते हुए कहा कि इस समूह की परिकल्पना उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक ऐसे मंच के रूप में की गई थी, जो एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (मल्टीपोलर वर्ल्ड ऑर्डर) को बढ़ावा दे सके। इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को प्रगाढ़ करना और अंतरराष्ट्रीय मामलों में ‘ग्लोबल साउथ’ (विकासशील देशों) की आवाज को मजबूती से उठाना था। उन्होंने कहा कि यह संगठन वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधार और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को समकालीन वास्तविकताओं के अनुरूप ढालने की उम्मीद पर टिका है, ताकि विकासशील देशों के हितों का सही प्रतिनिधित्व हो सके।
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार ने ब्रिक्स को शांति, प्रगति, आर्थिक विकास और आपसी सहयोग की साझा आकांक्षाओं से जुड़े देशों का एक विशिष्ट गठबंधन बताया और इसके निरंतर विस्तार पर संतोष व्यक्त किया। बदलते वैश्विक कूटनीतिक परिदृश्य का उल्लेख करते हुए उन्होंने अमेरिका और ईरान के बीच हुए हालिया समझौता ज्ञापन का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि भारत इस सकारात्मक घटनाक्रम को कूटनीतिक उम्मीदों के साथ देख रहा है, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्थिरता को बल मिलने की संभावना है। डोभाल के अनुसार, इस समझौते से ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित होगी और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के खुलने से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला की बाधाएं दूर होंगी। इससे फर्टिलाइजर और केमिकल्स जैसे प्रमुख क्षेत्रों की कमियां दूर होंगी और नौवहन की स्वतंत्रता मिलने से इस क्षेत्र सहित पूरी दुनिया की आर्थिक समृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
भावी सुरक्षा चिंताओं पर जोर देते हुए एनएसए ने सदस्य देशों को सीमाओं के पार से आने वाले उन गैर-पारंपरिक खतरों के प्रति सतर्क रहने की चेतावनी दी, जिनसे पारंपरिक तरीकों से लड़ना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि तेजी से डिजिटल होती दुनिया में साइबर खतरे, आतंकवाद के नए व छद्म रूप और विघटनकारी प्रौद्योगिकियां हमारे सामने गंभीर चुनौतियां पेश कर रही हैं। डोभाल ने जानकारी दी कि इस बैठक के दौरान आतंकवाद विरोधी उपायों (काउंटर-टेररिज्म) और सूचना एवं संचार तकनीक (आईसीटी) के सुरक्षित उपयोग से जुड़े ब्रिक्स संयुक्त कार्य समूहों (जॉइंट वर्किंग ग्रुप्स) के निष्कर्षों पर विस्तृत चर्चा की जाएगी, जो वर्तमान सुरक्षा माहौल में अत्यंत प्रासंगिक हैं। भारत की अध्यक्षता में हो रही इस उच्च स्तरीय बैठक में सदस्य देशों के शीर्ष सुरक्षा अधिकारी और प्रतिनिधिमंडलों के प्रमुख वैश्विक रणनीतिक मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने के लिए मंथन कर रहे हैं।