बीडीएल और एचएएल के बीच हुआ सैन्य समझौता, हेलीकॉप्टर मिसाइल लॉन्चरों की आपूर्ति के लिए 1,348 करोड़ रुपए का रक्षा सौदा तय

बीडीएल और एचएएल के बीच हुआ सैन्य समझौता, हेलीकॉप्टर मिसाइल लॉन्चरों की आपूर्ति के लिए 1,348 करोड़ रुपए का रक्षा सौदा तय

भारत डायनामिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ 1,347.71 करोड़ रुपए का एक बड़ा रक्षा अनुबंध हासिल करने में सफलता पाई है। कंपनी द्वारा बुधवार को स्टॉक एक्सचेंज के साथ साझा की गई वित्तीय और रणनीतिक जानकारी के अनुसार, इस सैन्य ऑर्डर के तहत स्वदेशी हेलीकॉप्टरों के लिए मिसाइल लॉन्चिंग सिस्टम की मैन्युफैक्चरिंग की जाएगी।

रक्षा क्षेत्र के इस महत्वपूर्ण सौदे को लेकर भारत डायनामिक्स ने स्पष्ट किया है कि अनुबंध की शर्तों के अनुसार सभी उपकरणों की डिलीवरी 24 से 60 महीनों की अवधि के भीतर पूरी करनी होगी। इस ऑर्डर के वित्तीय वर्गीकरण को देखें तो इसमें 1,109.37 करोड़ रुपए की राशि ‘हेलिना’ लॉन्चर और लाइन रिप्लेसेबल यूनिट्स (एलआरयू) के निर्माण के लिए तय की गई है। वहीं, बाकी बचे 238.34 करोड़ रुपए काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम एलआरयू के लिए निर्धारित किए गए हैं।

तकनीकी रूप से बेहद उन्नत ‘हेलिना’ मिसाइल प्रणाली को डीआरडीओ द्वारा पूरी तरह भारतीय तकनीकों से तैयार किया गया है। यह ‘फायर-एंड-फॉरगेट’ श्रेणी की तीसरी पीढ़ी की एक अचूक एंटी-टैंक मिसाइल है जो हेलीकॉप्टर से दागी जाती है। इसके लॉन्चर विशेष रूप से तैयार किए गए ट्विन-ट्यूब स्टब-विंग माउंट होते हैं, जिन्हें रुद्र और प्रचंड जैसे अत्याधुनिक स्वदेशी लड़ाकू हेलीकॉप्टरों में फिट किया जाता है। इनकी मदद से भारतीय वायुसेना और सेना दुश्मन के बख्तरबंद वाहनों और युद्धक टैंकों पर सटीक हवाई हमला करने में सक्षम होती है।

लड़ाकू विमानों की हवाई सुरक्षा के लिहाज से इसका दूसरा हिस्सा यानी काउंटर मेजर्स डिस्पेंसिंग सिस्टम भी बेहद महत्वपूर्ण है। यह प्रणाली हेलीकॉप्टरों के डिफेंसिव सेल्फ-प्रोटेक्शन सूट का मुख्य हिस्सा होती है। जब भी दुश्मन का कोई रडार या इन्फ्रारेड सेंसर वाली मिसाइल हेलीकॉप्टर को निशाना बनाती है, तो यह प्रणाली सक्रिय होकर हवा में चैफ और फ्लेयर्स उत्सर्जित करती है। इसके चलते दुश्मन की मिसाइलें रास्ता भटक जाती हैं। बीडीएल का मुख्य परिचालन क्षेत्र डीआरडीओ के तकनीकी सहयोग से स्वदेशी मिसाइलों और टॉरपीडो प्रणालियों का विकास करना है।

यह नया ऑर्डर कंपनी की वित्तीय स्थिति को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है, क्योंकि हालिया तिमाही में कंपनी के मुनाफे पर असर पड़ा है। वित्त वर्ष 26 की चौथी तिमाही की रिपोर्ट दर्शाती है कि बीडीएल का शुद्ध मुनाफा सालाना दर पर 58.5 फीसदी घटकर 113 करोड़ रुपए पर आ गया है, जो एक साल पहले की इसी तिमाही में 273 करोड़ रुपए था। इसी प्रकार सालाना कुल आय भी 73 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1,777 करोड़ रुपए से कम होकर 480 करोड़ रुपए के स्तर पर सिमट गई है।

मुनाफे और आय में आई इस कमी के कारण कंपनी के अन्य वित्तीय मानकों में भी बदलाव आया है। वित्त वर्ष 26 की जनवरी-मार्च तिमाही के दौरान कंपनी का एबिटा (EBITDA) पिछले वर्ष के 299 करोड़ रुपए से 81.5 प्रतिशत घटकर 55.2 करोड़ रुपए रह गया है। नतीजतन, बीडीएल का कामकाजी मार्जिन भी प्रभावित हुआ है, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 16.5 प्रतिशत के मुकाबले घटकर अब 11.5 प्रतिशत दर्ज किया गया है।

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