‘संविधान हत्या दिवस’ के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के एक वैचारिक लेख को जनता के बीच साझा किया। प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्रीय मंत्री का यह आलेख आपातकालीन शासन के दौरान देश की जनता की आजादी और उनके सपनों पर पहुंचे आघात को बेहद स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करता है। यह साझा प्रयास उस कालखंड की गंभीर परिस्थितियों को याद करने के उद्देश्य से किया गया है।
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा साझा किए गए इस लेख में आपातकाल के उस दौर का सजीव चित्रण है, जब देश के लोकतांत्रिक ताने-बाने और नागरिकों की स्वतंत्रता को भारी क्षति पहुंची थी। लेख के माध्यम से यह समझाने का प्रयास किया गया है कि किस तरह उस समय के घटनाक्रमों ने भारतीय लोकतंत्र की नींव और जन-आकांक्षाओं को प्रभावित किया था।
इसके अलावा, आलेख में वर्तमान सरकार की उन नीतियों की सराहना की गई है जो देश के गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के लिए चलाई जा रही हैं। प्रधानमंत्री ने जिक्र किया कि लेख में केंद्र सरकार द्वारा आयोजित किए गए ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ और ‘सेवा पर्व’ जैसे अभियानों का मूल्यांकन किया गया है, जो देशवासियों में ऐतिहासिक बोध जगाने और सांस्कृतिक स्मृतियों को जीवित रखने में कारगर रहे हैं।
लेख का एक मुख्य संदेश यह भी है कि देश के संवैधानिक मूल्यों की सुरक्षा और मजबूती केवल कानून से नहीं, बल्कि समृद्ध ऐतिहासिक चेतना से संभव है। प्रधानमंत्री ने आलेख के हवाले से कहा कि जब देश का हर नागरिक अपनी राष्ट्रीय विरासत के प्रति सजग होगा, तभी हमारी राष्ट्रीय अस्मिता और संवैधानिक मर्यादाओं को दीर्घकालिक मजबूती मिल सकेगी।
इस पूरे विषय पर डिजिटल माध्यम ‘एक्स’ पर अपनी बात रखते हुए प्रधानमंत्री ने सूचित किया कि केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने ‘संविधान हत्या दिवस’ के मौके पर आपातकाल की विभीषिका और जनता की स्वतंत्रता के हनन पर गहराई से अपनी बात रखी है। उन्होंने अंत में कहा कि यह आलेख यह भी दिखाता है कि किस तरह मौजूदा सरकार के अलग-अलग प्रयास देश के संवैधानिक ढांचे को निरंतर सशक्त कर रहे हैं।