उच्च सदन में 10 नवनिर्वाचित सांसदों ने ली सदस्यता की शपथ, विविध भाषाई और क्षेत्रीय रंग आए नजर

उच्च सदन में 10 नवनिर्वाचित सांसदों ने ली सदस्यता की शपथ, विविध भाषाई और क्षेत्रीय रंग आए नजर

संसद के उच्च सदन राज्यसभा में गुरुवार को एक गरिमापूर्ण समारोह के दौरान 10 नवनिर्वाचित और पुनर्निर्वाचित सदस्यों को पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई गई। सभापति सीपी राधाकृष्णन ने इन सभी सांसदों को आधिकारिक तौर पर सदन की सदस्यता की शपथ दिलाई। इस अवसर पर भारतीय लोकतंत्र की बहुभाषी छवि साफ तौर पर दिखाई दी, जहाँ विभिन्न राज्यों से चुनकर आए जनप्रतीनिधियों ने अलग-अलग भाषाओं में प्रतिज्ञान लिया।

उच्च सदन की सदस्यता ग्रहण करने वाले माननीय सदस्यों में प्रवीण चक्रवर्ती, देबाशीष सामंतराय, सना सतीश बाबू, विजय चिंतकायाला, भाष्यम राम कृष्ण, लिंगामनेनी रमेश, राजेश परमानंद शुक्ला, बैद्यनाथ राम, परिमल नथवानी और ताई टागाक शामिल हैं। इस औपचारिक प्रक्रिया के संपन्न होने के साथ ही ये सभी नेता अब राज्यसभा की आगामी कार्यवाहियों और बहसों में हिस्सा लेने के लिए पूरी तरह पात्र हो गए हैं।

इस शपथ ग्रहण समारोह के दौरान देश की समृद्ध भाषाई विविधता का एक सुंदर स्वरूप देखने को मिला। कुल 10 सांसदों में से 5 सदस्यों ने अपनी बात रखने के लिए हिंदी भाषा को चुना। इसके अलावा, तीन माननीय सांसदों ने तेलुगु, एक ने तमिल और एक सदस्य ने अंग्रेजी भाषा में शपथ ग्रहण की। यह वाकया भारतीय संविधान द्वारा सभी क्षेत्रीय भाषाओं को दिए जाने वाले सम्मान और देश की लोकतांत्रिक बहुभाषी साख को मजबूती से रेखांकित करता है।

यदि क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व के नजरिए से देखें तो इस बार आंध्र प्रदेश से सर्वाधिक चार सदस्यों ने राज्यसभा की सदस्यता ली है। इसके बाद झारखंड राज्य से दो सांसदों ने शपथ ली। वहीं तमिलनाडु, ओडिशा, गुजरात और अरुणाचल प्रदेश से भी एक-एक निर्वाचित सदस्य इस समूह का हिस्सा रहे। अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों से आए इन प्रतिनिधियों के कारण उच्च सदन में राज्यों की आवाज को और अधिक विस्तार मिलने की संभावना है।

इस महत्वपूर्ण संवैधानिक कार्यक्रम के दौरान कई गणमान्य व्यक्ति भी संसद में उपस्थित रहे। इनमें केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री अर्जुन राम मेघवाल और राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी प्रमुख थे। इनके साथ ही सदन के अन्य सदस्य तथा राज्यसभा सचिवालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपनी उपस्थिति से समारोह की गरिमा बढ़ाई।

सदन में शपथ ग्रहण की यह व्यवस्था हमारे लोकतंत्र की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और अनिवार्य संवैधानिक परिपाटी है। इसके जरिए जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि देश के संविधान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हैं। साथ ही, वे आम जनता की उम्मीदों और उनके अधिकारों की रक्षा करने का दायित्व भी संभालते हैं। नए और दोबारा चुने गए इन सदस्यों के आने से उच्च सदन में क्षेत्रीय समस्याओं को एक नया दृष्टिकोण और बल मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

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