वैश्विक निवेश बैंक जेपी मॉर्गन ने अपनी हालिया रिपोर्ट में दावा किया है कि भारत में हाल के वर्षों के दौरान किए गए कर (टैक्स) सुधारों और विभिन्न नीतिगत कदमों के कारण घरेलू निवेश में भारी बढ़ोतरी हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो सालों में शेयर बाजार से उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं मिलने के बावजूद भारतीय निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बनी हुई है। इन बदलावों ने देश के इक्विटी बाजार को निवेशकों के लिए पहले से कहीं अधिक आकर्षक बना दिया है।
ग्लोबल इन्वेस्टमेंट बैंक के मुताबिक, सरकार द्वारा लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG), डेट म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स के टैक्स नियमों में किए गए हालिया संशोधनों ने घरेलू परिवारों की बचत को वित्तीय संपत्तियों की ओर मोड़ने में बड़ी भूमिका निभाई है। रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि वर्तमान में इक्विटी पर 12.5 प्रतिशत का लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स प्रभावी है। इसके साथ ही, इंडेक्सेशन के लाभ को समाप्त करने, चुनिंदा बीमा पॉलिसियों से होने वाली आय पर टैक्स लगाने और डेट म्यूचुअल फंड पर स्लैब-रेट के हिसाब से टैक्स वसूलने जैसे नीतिगत बदलावों ने निवेशकों को इक्विटी की तरफ रुख करने के लिए प्रेरित किया है।
जेपी मॉर्गन का मानना है कि कर और नियामक व्यवस्था में आए इन बदलावों के साथ-साथ सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के माध्यम से आम लोगों की बढ़ती हिस्सेदारी के चलते इक्विटी मार्केट में घरेलू फंड का यह प्रवाह आगे भी जारी रहने की पूरी उम्मीद है। वित्त वर्ष 2025 और 2026 के आंकड़ों का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि इस अवधि में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) द्वारा भारतीय बाजारों से पूंजी निकालने के बाद भी घरेलू निवेशक मजबूती से डटे रहे। इस दौरान भले ही बेंचमार्क इंडेक्स से बहुत मामूली रिटर्न हासिल हुआ, लेकिन खुदरा निवेशकों ने एसआईपी के जरिए अपना निवेश बंद नहीं किया। यह रुझान दर्शाता है कि भारतीय बाजार में निवेश के तौर-तरीकों में एक बड़ा और स्थाई बदलाव आया है, जो केवल बाजार के अल्पकालिक उतार-चढ़ाव पर आधारित नहीं है।
रिपोर्ट में इस बात पर विशेष जोर दिया गया है कि घरेलू निवेशकों का यह निरंतर समर्थन भारतीय इक्विटी बाजार के लिए एक मजबूत सुरक्षा कवच साबित हुआ है। इसकी वजह से विदेशी फंड्स की बिकवाली और वैश्विक स्तर पर पैदा हुए अनिश्चितता के माहौल में भी भारतीय बाजार में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित रखने में मदद मिली है।
दूसरी ओर, जेपी मॉर्गन ने भारत के सूचना प्रौद्योगिकी (IT) क्षेत्र को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। निवेश बैंक का अनुमान है कि एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के तेजी से होते विस्तार और भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी अनिश्चितताओं के कारण आईटी सेक्टर को लंबी अवधि तक सुस्त विकास दर (स्लो ग्रोथ) से गुजरना पड़ सकता है। रिपोर्ट के निष्कर्षों के अनुसार, तकनीकी बदलावों और बिजनेस साइकिल से जुड़ी चुनौतियों के एक साथ सामने आने के कारण इस क्षेत्र में मांग को लेकर फिलहाल अनिश्चितता की स्थिति बनी हुई है।