स्वदेशी विनिर्माण में बड़ी कामयाबी: भारत का पहला मेड-इन-इंडिया एक्जिम शिपिंग कंटेनर रवाना, मर्स्क ने दिया 1,000 और कंटेनरों का ऑर्डर

स्वदेशी विनिर्माण में बड़ी कामयाबी: भारत का पहला मेड-इन-इंडिया एक्जिम शिपिंग कंटेनर रवाना, मर्स्क ने दिया 1,000 और कंटेनरों का ऑर्डर

केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने शुक्रवार को उत्तर प्रदेश के दादरी में स्थित मर्स्क-कॉनकोर अंतर्देशीय कंटेनर डिपो से देश के पहले स्वदेशी निर्यात-आयात (एक्जिम) शिपिंग कंटेनर को झंडी दिखाकर वैश्विक नौवहन कंपनी एपी मोलर-मर्स्क के लिए रवाना किया। यह कदम देश के समुद्री और विनिर्माण क्षेत्र में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह बड़ी सफलता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मेक इन इंडिया’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘समुद्री अमृत काल विजन-2047’ के संकल्पों को धरातल पर उतारने की दिशा में एक अत्यंत महत्वपूर्ण कदम है।

भारतीय विनिर्माण क्षमता पर अपना गहरा विश्वास जताते हुए वैश्विक शिपिंग दिग्गज मर्स्क ने डीसीएम श्रीराम ग्रुप को देश में निर्मित 1,000 अतिरिक्त शिपिंग कंटेनरों की आपूर्ति का नया ऑर्डर भी जारी किया है। इस व्यावसायिक कदम को दोनों पक्षों के बीच एक टिकाऊ और दीर्घकालिक साझेदारी की शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से अंतरराष्ट्रीय समुद्री आपूर्ति श्रृंखला के भीतर भारत की हिस्सेदारी और पैठ काफी मजबूत होगी।

इस बड़ी उपलब्धि की पृष्ठभूमि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और एपी मोलर-मर्स्क के पर्यवेक्षी बोर्ड के अध्यक्ष रॉबर्ट मर्स्क उगला के बीच फरवरी 2025 में आयोजित हुई उच्च स्तरीय बैठक से जुड़ी है। उस दौरान प्रधानमंत्री ने कंपनी को भारत के भीतर अंतरराष्ट्रीय स्तर के कंटेनर निर्माण उद्योग को स्थापित करने के लिए प्रेरित किया था। इस वार्ता के महज 16 महीनों के भीतर देश में निर्मित पहले एक्जिम शिपिंग कंटेनर की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खरीद शुरू हो जाना केंद्र सरकार की तेज कार्यप्रणाली और योजनाओं के त्वरित क्रियान्वयन को प्रमाणित करता है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने देश की क्षमताओं को रेखांकित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में देश एक विश्वसनीय वैश्विक विनिर्माण केंद्र और समुद्री ताकत के रूप में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश में केवल नौवहन कंटेनरों का निर्माण ही नहीं किया जा रहा है, बल्कि ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की प्राप्ति हेतु वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी एक संपूर्ण समुद्री विनिर्माण इकोसिस्टम तैयार किया जा रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि भारत में तैयार यह पहला कंटेनर अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों, सुरक्षा मापदंडों, आईएसओ विनिर्देशों तथा सुरक्षित कंटेनरों से जुड़ी वैश्विक संधियों के पूर्णतः अनुकूल है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय उपयोग के योग्य बनाता है।

इस उद्योग को मिलने वाले सरकारी सहयोग का जिक्र करते हुए सोनोवाल ने बताया कि मोदी सरकार ने केंद्रीय बजट 2026 में 10 हजार करोड़ रुपये की भारी-भरकम ‘कंटेनर विनिर्माण प्रोत्साहन योजना’ की घोषणा की है। इस रणनीतिक पहल का मुख्य उद्देश्य दूसरे देशों से आयात किए जाने वाले कंटेनरों पर भारत की निर्भरता को न्यूनतम करना, देश के भीतर विनिर्माण को गति देना और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतिस्पर्धी उत्पादन व्यवस्था का विकास करना है। इस योजना के माध्यम से नए (ग्रीनफील्ड) और मौजूदा (ब्राउनफील्ड) विनिर्माण संयंत्रों को पूंजीगत सहायता, परिचालन संबंधी मदद, अनुसंधान एवं विकास, गुणवत्ता परीक्षण, कौशल उन्नयन और क्षमता विस्तार के लिए वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया जा रहा है।

इस योजना के भविष्य के लक्ष्यों को साझा करते हुए केंद्रीय मंत्री ने बताया कि कंटेनर निर्माण संवर्धन योजना के माध्यम से देश की सालाना कंटेनर उत्पादन क्षमता को 10 गुना बढ़ाकर 7.5 लाख टीईयू (ट्वेंटी-फुट इक्विवेलेंट यूनिट) तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है। उत्पादन में होने वाली इस भारी बढ़ोतरी से देश में रोजगार के व्यापक नए अवसर सृजित होंगे, आधुनिक तकनीकी का हस्तांतरण सुगम होगा और देश की आंतरिक एवं बाहरी आपूर्ति श्रृंखला अधिक सुदृढ़ बनेगी। सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य भारत को कंटेनर निर्माण के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने के साथ-साथ इसे उच्च गुणवत्ता वाले कंटेनरों के एक बड़े वैश्विक निर्यात केंद्र के रूप में स्थापित करना है।

समुद्री क्षेत्र में चल रहे व्यापक बदलावों की चर्चा करते हुए सोनोवाल ने बताया कि व्यापार को अधिक सुगम बनाने के लिए सरकार द्वारा व्यावसायिक जहाजरानी अधिनियम-2025, तटीय नौवहन अधिनियम-2025 और भारतीय पत्तन अधिनियम-2025 जैसे युगांतरकारी विधायी सुधार लागू किए जा चुके हैं। इसके अतिरिक्त, इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 70 हजार करोड़ रुपये की ‘जहाज निर्माण वित्तीय सहायता योजना’ के साथ-साथ ‘वन नेशन-वन पोर्ट प्रोसेस’, मैरीटाइम सिंगल विंडो और ई-समुद्र जैसी आधुनिक डिजिटल प्रणालियों की भी शुरुआत की गई है। भारत वर्तमान में जहाजों के पुनर्चक्रण (शिप रीसाइक्लिंग) के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों की कतार में शामिल हो रहा है। इसके साथ ही देश के तीन प्रमुख बंदरगाह वैश्विक कंटेनर पोर्ट परफॉर्मेंस इंडेक्स (सीपीपीआई) 2025 की शीर्ष-30 सूची में अपना स्थान सुरक्षित कर चुके हैं। वर्तमान में देश में वधावन बंदरगाह, अंतरराष्ट्रीय कंटेनर ट्रांसशिपमेंट पोर्ट, टूना टेकरा कंटेनर टर्मिनल और आउटर हार्बर कंटेनर टर्मिनल जैसी मेगा परियोजनाओं के विकास पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है।

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