केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शुक्रवार को नई दिल्ली में बोर्ड ऑफ ट्रेड की उच्च स्तरीय बैठक के दौरान देश के निर्यात को लेकर सरकार के भविष्य के रोडमैप को साझा किया। उन्होंने बताया कि भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1 ट्रिलियन डॉलर के कुल निर्यात का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है, जो पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) के 863 अरब डॉलर के आंकड़े की तुलना में दोहरे अंकों की उल्लेखनीय वृद्धि की मांग करता है। इस दौरान उन्होंने विश्वास जताया कि जून तिमाही के व्यापारिक आंकड़े काफी उत्साहजनक हैं और देश सही रास्ते पर अग्रसर है।
बैठक में व्यापारिक लक्ष्यों का ब्योरा देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वस्तु और सेवा निर्यात के लिए पृथक लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। चालू वित्तीय वर्ष में देश के वस्तु निर्यात को 530 अरब डॉलर के पार पहुंचाने की तैयारी है, जिसके लिए इसमें लगभग 17 फीसदी का उछाल लाना होगा। दूसरी ओर, सेवा क्षेत्र के निर्यात को पिछले साल के 421 अरब डॉलर के स्तर से उठाकर 470 अरब डॉलर के करीब ले जाने की योजना है, जिसके तहत इसमें करीब 11 फीसदी की बढ़त दर्ज करनी होगी।
वाणिज्य मंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश का प्रशासनिक तंत्र व्यापारिक मोर्चे पर बड़े और दूरगामी लक्ष्यों को हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने देश के समस्त निर्यातकों और उद्योगपतियों को प्रेरित करते हुए कहा कि सभी पक्षों को एक टीम की तरह जुटना होगा ताकि देश इस 1 ट्रिलियन डॉलर के व्यापारिक लक्ष्य को हर हाल में प्राप्त कर सके। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के बढ़ते महत्व का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि वैश्विक परिदृश्य पर देश की मजबूत होती आर्थिक स्थिति के कारण आज भारतीय उत्पादों के लिए अभूतपूर्व अवसर तैयार हुए हैं, जिसका लाभ उठाने के लिए देश के उद्योगों को केवल स्थानीय बाजार के भरोसे बैठने के बजाय वैश्विक रुख अपनाना होगा।
उद्योग जगत को प्रेरित करते हुए पीयूष गोयल ने कहा, “मेरा मानना है कि लक्ष्य हमेशा बड़ा और महत्वाकांक्षी होना चाहिए। आइए, हम सभी मिलकर इस ऊंचे मुकाम को छूने का प्रयास करें। वर्तमान दौर में भारत की छवि एक सुरक्षित और विश्वसनीय व्यापारिक साझेदार की बनी है, जिसके चलते दुनिया भर के देश हमारे साथ व्यापार बढ़ाने के इच्छुक हैं। अब समय आ गया है कि हम आगे बढ़कर वैश्विक मंच पर अपनी उपस्थिति दर्ज कराएं।”
बाजार की रणनीतियों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धा में टिकने के लिए सिर्फ कीमतों को कम रखना काफी नहीं है। इसके लिए देश के उत्पादों की गुणवत्ता को वैश्विक मानदंडों के अनुरूप बनाना होगा, कार्यकुशलता और कौशल विकास पर ध्यान देना होगा तथा दुनिया भर में अपने ब्रांड स्थापित करने होंगे। उन्होंने निर्यातकों को सक्रिय रुख अपनाने और ग्राहकों से सीधे संपर्क साधने की सलाह दी। उन्होंने बताया कि सरकार ‘एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन’ के माध्यम से विदेशों में भारतीय कंपनियों की ब्रांडिंग को पूरा सहयोग देगी, क्योंकि घर बैठे वैश्विक बाजार में जगह बनाना मुमकिन नहीं है और इसके लिए कड़ी मेहनत की आवश्यकता है।
अंत में, उन्होंने नए मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) को देश के आर्थिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने आधिकारिक सूचना दी कि ओमान के साथ किया गया व्यापार समझौता 1 जून से पूरी तरह लागू हो चुका है, और भारत-ब्रिटेन मुक्त व्यापार समझौता भी आगामी 15 जुलाई तक प्रभावी होने की पूरी उम्मीद है। इन समझौतों के माध्यम से घरेलू निर्यातकों के लिए दुनिया के प्रमुख और बड़े बाजारों के रास्ते खुल जाएंगे, जिससे आने वाले समय में देश के निर्यात कारोबार को भारी गति मिलेगी।