जकार्ता में मंगलवार को आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने देश के सबसे बड़े नागरिक सम्मान ‘बिन्तांग अदिपुर्ना ऑफ द रिपब्लिक ऑफ इंडोनेशिया’ से विभूषित किया। इस द्विपक्षीय शिखर वार्ता के दौरान दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने रक्षा, व्यापार, समुद्री सुरक्षा और ऊर्जा जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में आपसी संबंधों को और मजबूत करने पर विस्तृत चर्चा की। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री मोदी को अब तक 25 से अधिक देश अपने शीर्ष राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित कर चुके हैं, जिनमें सेशेल्स का ‘गार्डियन ऑफ द ब्लू होराइजन’ भी शामिल है।
मंगलवार को हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में भारत और इंडोनेशिया के बीच व्यापारिक तथा रणनीतिक साझेदारी को एक नई दिशा देने पर मंथन हुआ। दोनों नेताओं ने मई 2018 में तय की गई ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के तहत अब तक हुई प्रगति का आकलन किया। इस वार्ता में विशेष रूप से खाद्य सुरक्षा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति और रक्षा सहयोग को गहरा करने की प्रतिबद्धता जताई गई।
इससे पहले, जकार्ता स्थित राष्ट्रपति भवन ‘इस्ताना मर्डेका’ (मर्डेका पैलेस) पहुंचने पर प्रधानमंत्री मोदी का औपचारिक और पारंपरिक स्वागत किया गया। इस दौरान दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कई महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoU) पर हस्ताक्षर किए। प्रधानमंत्री ने जकार्ता में हुए इस गर्मजोशी से भरे स्वागत की झलकियों का एक वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर साझा करते हुए लिखा कि वह राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ होने वाली इस चर्चा को लेकर बेहद उत्सुक हैं।
अपनी यात्रा के दूसरे दिन जब प्रधानमंत्री कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ रहे थे, तब वहां सड़कों पर दोनों देशों के झंडे लिए स्कूली बच्चे उनके स्वागत के लिए खड़े नजर आए। प्रधानमंत्री ने भी बच्चों के पास जाकर उनका अभिवादन स्वीकार किया। मर्डेका पैलेस में आगमन पर राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो ने स्वयं आगे बढ़कर प्रधानमंत्री मोदी को गले लगाया और उनका आत्मीय स्वागत किया।
औपचारिक स्वागत के बाद प्रधानमंत्री ने इंडोनेशिया सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों और प्रशासनिक अधिकारियों से परिचय प्राप्त किया, वहीं राष्ट्रपति सुबियांतो ने भारतीय प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों से मुलाकात की। इसके पश्चात, प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्रपति सुबियांतो की उपस्थिति में राष्ट्रपति भवन की आगंतुक पुस्तिका (विजिटर बुक) में अपना संदेश दर्ज कर हस्ताक्षर किए।