इंडो-पैसिफिक में ऊर्जा सुरक्षा को बल: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच छोटे परमाणु रिएक्टरों को लेकर बड़ा समझौता

इंडो-पैसिफिक में ऊर्जा सुरक्षा को बल: अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया के बीच छोटे परमाणु रिएक्टरों को लेकर बड़ा समझौता

अमेरिका, जापान और दक्षिण कोरिया ने मंगलवार को तीसरे देशों में स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर (एसएमआर) की स्थापना में तेजी लाने के उद्देश्य से एक महत्वपूर्ण त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। शुरुआती चरण में इस परियोजना के तहत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र पर विशेष ध्यान केंद्रित किया जाएगा। सिविल न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी और ऊर्जा सुरक्षा के मोर्चे पर तीनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक तालमेल की दिशा में इस कदम को बेहद अहम माना जा रहा है। तुर्की की राजधानी अंकारा में आयोजित नाटो शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो, जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने इस सहयोग ज्ञापन (एमओसी) को अंतिम रूप दिया।

इस अवसर पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ऊर्जा सुरक्षा को वैश्विक स्तर पर एक बड़ी चुनौती बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता तीनों राष्ट्रों की प्रगाढ़ होती रणनीतिक साझेदारी का एक सीधा परिणाम है। होर्मुज जलडमरूमध्य और विश्व के अन्य हिस्सों में जारी हालिया घटनाक्रमों का हवाला देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि ऊर्जा सुरक्षा आज के समय का सबसे संवेदनशील विषय बन चुकी है। रुबियो ने रेखांकित किया कि यह साझेदारी तीनों देशों को एसएमआर तकनीक पर साथ मिलकर काम करने का अवसर देगी, जो भविष्य में बिजली उत्पादन का एक मुख्य आधार बनने जा रही है। इससे तीनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने जापान और दक्षिण कोरिया के बीच बेहतर होते द्विपक्षीय संबंधों की सराहना करते हुए कहा कि अतीत की चुनौतियों के बावजूद दोनों सहयोगियों के रिश्ते पिछले तीन-चार वर्षों में अधिक सुदृढ़ हुए हैं और अमेरिका ने हमेशा इस जुड़ाव को बढ़ावा दिया है।

जापान के विदेश मंत्री मोटेगी तोशिमित्सु ने इस समझौते का स्वागत करते हुए कहा कि तीनों देश पिछले वर्ष अक्टूबर से ही कई मोर्चों पर निरंतर ठोस प्रयास कर रहे हैं। इन प्रयासों में उत्तर कोरिया से मिलने वाली साइबर चुनौतियों का मुकाबला करना और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना शामिल रहा है। उन्होंने एसएमआर सहयोग से जुड़े इस समझौते को एक बड़ी और ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। वहीं, दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून ने विश्वास जताया कि तीनों देश इस अत्याधुनिक तकनीक के सहारे वैश्विक चुनौतियों का मिलकर सामना करने में सक्षम होंगे।

आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस नए ढांचे का मुख्य उद्देश्य तीनों देशों के परमाणु उद्योगों के बीच आपसी समन्वय को बढ़ाना है। इसके तहत फ्लीट डिप्लॉयमेंट मॉडल को बढ़ावा देने, परियोजनाओं में वित्तीय और तकनीकी जोखिमों को कम करने, निजी पूंजी को आकर्षित करने, लाइसेंस मिलने की प्रक्रिया को सुगम बनाने और सप्लाई चेन को मजबूत करने पर काम किया जाएगा। इस साझा रुख से अमेरिकी, जापानी और दक्षिण कोरियाई कंपनियों को वैश्विक बाजार में ज्यादा प्रतिस्पर्धी परमाणु ऊर्जा समाधान पेश करने में मदद मिलेगी, जबकि परमाणु सुरक्षा, संरक्षा और अप्रसार के कड़े मानकों का पूरी तरह पालन किया जाएगा।

इस पहल को और गति देने के लिए अमेरिका ने ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर टेक्नोलॉजी के जिम्मेदार इस्तेमाल के लिए बुनियादी ढांचा’ (FIRST) कार्यक्रम के अंतर्गत 10 मिलियन डॉलर से अधिक की नई वित्तीय सहायता की घोषणा की है। इस राशि का उपयोग इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के देशों को तकनीकी सहायता प्रदान करने, परमाणु परियोजनाओं के विकास को गति देने और कार्यबल को प्रशिक्षित करने के लिए एक रीजनल ट्रेनिंग हब स्थापित करने में किया जाएगा। गौरतलब है कि एसएमआर ऐसे आधुनिक परमाणु रिएक्टर होते हैं जिन्हें स्थापित करने के लिए पारंपरिक संयंत्रों की तुलना में बेहद कम जगह और शुरुआती बजट की आवश्यकता होती है, जिससे सुरक्षित, निरंतर और कम कार्बन वाली बिजली का उत्पादन संभव हो पाता है।

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