आईएमएफ का अनुमान: साल 2026 में 7 फीसदी की विकास दर के साथ भारत बना रहेगा सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

आईएमएफ का अनुमान: साल 2026 में 7 फीसदी की विकास दर के साथ भारत बना रहेगा सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने अपनी हालिया ‘वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक’ रिपोर्ट में साल 2026 के दौरान वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की जीडीपी विकास दर 7 प्रतिशत रहने की संभावना जताई है। चालू कैलेंडर वर्ष के इन आंकड़ों के साथ भारत विश्व की सबसे तीव्र गति से आगे बढ़ने वाली मुख्य अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी स्थिति मजबूत बनाए हुए है। आईएमएफ के मुताबिक, इसके अगले कैलेंडर वर्ष में देश की आर्थिक वृद्धि की गति थोड़ी धीमी होकर 6.4 प्रतिशत पर आ सकती है।

रिपोर्ट के विश्लेषण के अनुसार, भारतीय अर्थव्यवस्था को मुख्य रूप से घरेलू स्तर पर निजी खपत में आ रही मजबूती और सेवा क्षेत्र (सर्विस सेक्टर) के बेहतरीन प्रदर्शन से सहारा मिल रहा है। इस रिपोर्ट में भारत की वृद्धि के दो अलग-अलग मानक पेश किए गए हैं, जिनमें से एक कैलेंडर वर्ष पर आधारित है और दूसरा देश के आधिकारिक वित्तीय वर्ष (अप्रैल-मार्च) पर केंद्रित है।

यदि भारत के वित्तीय वर्ष के दृष्टिकोण से देखें, तो वैश्विक संस्था ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए जीडीपी वृद्धि दर 6.4 प्रतिशत रहने की बात कही है। वहीं, इसके अगले वित्त वर्ष में गति पकड़कर 6.7 प्रतिशत पर पहुंचने की उम्मीद जताई गई है। इन अनुमानों के लिहाज से भी भारत वैश्विक पटल पर शीर्ष स्थान पर बरकरार है।

आईएमएफ ने अपनी अप्रैल की पिछली रिपोर्ट की तुलना में मौजूदा वित्तीय वर्ष के अनुमान में 0.1 प्रतिशत की मामूली कटौती की है, जबकि आगामी वित्तीय वर्ष के लिए इसमें 0.2 प्रतिशत का इजाफा किया है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया कि ईरान युद्ध के असर से ठीक पहले, वित्तीय वर्ष 2025-26 के दौरान भारत की विकास दर 7.7 प्रतिशत दर्ज की गई थी।

संस्था ने अनुमान जताया है कि भारत की आर्थिक रफ्तार दुनिया की औसत वृद्धि दर से दोगुनी से भी अधिक रहने वाली है। इस साल वैश्विक अर्थव्यवस्था की विकास दर 3 प्रतिशत और अगले साल 3.4 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। आईएमएफ ने दुनिया की आर्थिक सेहत पर संतोष जताते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था ने युद्ध के कारण उत्पन्न हुए झटकों को उम्मीद से बेहतर तरीके से संभाला है।

रिपोर्ट के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का प्रभाव आवश्यक वस्तुओं (कमोडिटी) के दामों, महंगाई की आशंकाओं और वित्तीय बाजारों पर काफी सीमित रहा है। इसके साथ ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की प्रगति और इसके बढ़ते इस्तेमाल से तकनीकी क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर मांग बढ़ी है, जिसने पश्चिम एशिया के तनाव से हुए नुकसान की काफी हद तक भरपाई की है।

दुनिया की अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की बात करें तो चीन की विकास दर इस वर्ष 4.6 प्रतिशत और अगले वर्ष गिरकर 4.1 प्रतिशत रहने का अनुमान है। वहीं, अमेरिकी अर्थव्यवस्था के इस साल 2.3 प्रतिशत और अगले साल 2.2 प्रतिशत की दर से बढ़ने की संभावना है। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक टेलीविजन साक्षात्कार में भारतीय अर्थव्यवस्था की सराहना करते हुए कहा था कि भारत की 7-8 प्रतिशत की जीडीपी वृद्धि दर अमेरिका के लिए भी एक बेंचमार्क हो सकती है। ट्रंप ने इसके लिए अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को ऊंचा रखने की नीति को जिम्मेदार ठहराया, जिससे उनके देश के लिए बड़े आर्थिक लक्ष्यों को पाना कठिन हो रहा है।

यूरोपीय संघ (EU) के संदर्भ में आईएमएफ का अनुमान है कि यह क्षेत्र इस वर्ष महज 0.9 प्रतिशत और अगले वर्ष 1.2 प्रतिशत की दर से ही आगे बढ़ पाएगा। भारत को लेकर आईएमएफ के ये आंकड़े अन्य वैश्विक और घरेलू वित्तीय संस्थाओं के आकलनों से मेल खाते हैं।

विश्व बैंक ने पिछले महीने के अपने अनुमानों में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की विकास दर 6.6 प्रतिशत और अगले वित्त वर्ष के लिए 7.2 प्रतिशत तय की थी। संयुक्त राष्ट्र ने भी इस साल भारत के लिए 6.4 प्रतिशत की वृद्धि का अनुमान लगाया है। संयुक्त राष्ट्र के वैश्विक आर्थिक निगरानी प्रभाग के मुख्य अर्थशास्त्री इंगो पिटरले के अनुसार, मजबूत उपभोक्ता मांग, सरकारी निवेश और सेवाओं के निर्यात में अच्छे प्रदर्शन के कारण भारत की आर्थिक तरक्की को ढांचागत मजबूती मिल रही है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने भी पिछले महीने चालू वित्त वर्ष में देश की विकास दर 6.6 प्रतिशत रहने की बात कही थी। इसके अतिरिक्त, बैंक ऑफ अमेरिका ने साल 2026 में भारत की जीडीपी वृद्धि के अनुमान को अप्रैल के 6.2 प्रतिशत से बढ़ाकर 7 प्रतिशत कर दिया है। वहीं, गोल्डमैन सैक्स ने भी पिछले महीने के अंत में कैलेंडर वर्ष 2026 के लिए अपने पूर्व अनुमान 6.5 प्रतिशत को संशोधित कर 6.8 प्रतिशत कर दिया है।

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